बैंकों के दो दिवसीय हड़ताल से उपभोक्ता परेशान

भरतपुर/ राजेन्द्र शर्मा जती ।भरतपुर में सोमवार को सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण के प्रस्ताव के खिलाफ बैंककर्मी हडताल पर रहे। इस अवसर पर यूनाईटेड फाॅरम आॅफ बैंक यूनियन्स के तत्वाधान में पंजाब नैशनल बैक के मंडल कार्यालय के समक्ष भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के
निजीकरण के विरोध में सभी बैंकों के लगभग 400 से अधिकअधिकारी-कर्मचारियों
ने प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

हड़ताल सरकार की जनविरोधी बैंकिंग एवं आर्थिक नीतियों एवं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण एवं उनमें निवेश के सरकार के फैसले के विरोध में आयोजित किया गया। बैंक कर्मियों ने कहा कि आम जनता एवं किसान लघु बचत करते है।पेंशन भोगियों,छोटे एवं मध्यम आकार के उद्यमियों, व्यापारियों, स्वरोजगार, यू विद यार थीम, महिलाओ,पिछड़े वर्गों, बेरोजगारों एवं कर्मचारियों के रूप में देश की 95% जनता के हितों की रक्षा के लिए कार्य करती है। बैंक निजीकरण का मतलब है ग्रामीण शाखाओं का बंद होना एवं बैंकों का अधिक से अधिक शहर उन्मुखीकरण होना।

 

भरतपुर शहर के सार्वजनिक क्षेत्र के किसी भी बैंक के ताले तक नहीं खुले जिसकी वजह से 225 करोड का कारोबार प्रभावित हुआ एवं क्लियरिंग हाउस भी पूरी तरह ठप्प रहा। प्रदर्शन के दौरान बैंककर्मियों द्वारा भारत सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ नारे लगाये गये। बैककर्मियों ने बताया कि 4, 9 और 10 मार्च को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला इसलिए 15 और 16 मार्च को लगातार दो दिन हड़ताल का फैसला लिया गया था। दो दिन बैंक बंद
रहने से आमजन को परेशानी का सामना करना पड रहा है।

हड़ताल के चलते बैंक शाखाओं में पैसा निकालने और जमा करने, चेक क्लीयरेंस और ऋण मंजूरी जैसी सेवाओं पर बाधित रही। हालांकि बैंकों के द्वारा दो दिवसीय हडताल के बारे में पूर्व ही सूचना दे दी थी। इस अवसर पर एआईपीएनबीओए के मंडल सचिव भजन लाल मीणा, यूएफबीयू के महासचिव ओ.पी. जैन, एसबीआई के गोपाल सिंह, पीएनबी ईयू से राजेश तनेजा के अलावा अन्य वक्ताओं ने भी मंच पर अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम का संचालन विक्रम सिंह राजावत के द्वारा किया।