340 सीढ़ियां चढ़कर वसुंधरा राजे ने किया भगवान शिव का अभिषेक

फोटो- पहाड की चढ़ाई चढ़कर शिव मंदिर जाती वसुंधरा राजे

भरतपुर /कामां/राजेन्द्र शर्मा जती । पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के जन्म दिवस के अवसर पर चल रही दो दिवसीय देव दर्शन यात्रा के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे आदि बद्री धाम में विश्राम तक रात्रि विश्राम करने के बाद सोमवार को गांव बरौलीधाऊ व बिलौंद होते हुए केदारनाथ धाम पहुंची पूर्मु मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने यहां 340 सीढ़ियां चढ़कर पहाड़ पर स्थित भगवान शिव का अभिषेक व पूजा अर्चना की |

आदिबद्री धाम में रात्रि विश्राम करने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की देव दर्शन यात्रा काफिले जैसे ही गांव बरौलीधाऊ गांव में प्रवेश किया तो वहां भाजपा नेता फतेहराम गुर्जर के नेतृत्व में ग्रामीणों ने बैंड बाजों के साथ अगवानी की और चांदी का मुकुट पहनाकर वसुंधरा राजे का स्वागत किया इस दौरान पूर्व विधायक जगत सिंह उनकी पत्नी सोमाया सिंह व बेटे हणूत सिंह ,जवाहर सिंह बेढम भी मौजूद रहे इस दाैरान पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ग्रामीण महिलाओं से भी वार्ता कर उनके हाल-चाल पूछे|

केदारनाथ धाम पहुंचने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राजे 340 सीढ़ियाो की चढ़ाई चढ़कर पहाड पर स्थित शिव मंदिर पहुंची और भगवान शिव का अभिषेक व पूजा-अर्चना की इस दौरान उनके साथ नगर की पूर्व विधायक अनीता सिंह ,भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व मंत्री यूनुस खान भी मौजूद रहे|

पूजा अर्चना के बाद मंदिर परिसर में ही सम्मान समारोह का आयोजन हुआ जहां गॉव बिलौंद व सभी समाजो के लोगो ने राजे का सम्मान किया कार्यक्रम समाप्ति के बाद हेलीपैड पर पहुंची संविलियन तेरे वादे ने सैनिक कल्याण बोर्ड के पूर्व चेयरमैन प्रेम सिंह बाजोर , प्रहलाद गुंजल सहित तमाम बड़े नेताओं से मुलाकात की|

हेलीपैड पर  मुलाकात करने वालों में सचिन शर्मा ,मनोज सिंघल ,कामा नगर पालिका के पूर्व पालिका अध्यक्ष निहाल मीणा, फतेह राम गुर्जर, बजरंग दल के जिला संयोजक रामेश्वर गुर्जर कलावटा, अली हुसैन ,मोनू गुलाटी ,उत्तम जैन विजय गुर्जर कनवाड़ा सहित अन्य लोग मौजूद रहै।

विधि-विधान से भगवान केदारनाथ की पूजा अर्चना करने के बाद पहाड से नीचे उतरकर मंदिर प्रांगण में मौजूद विशाल जनसमूह ने उनका स्वागत किया. राजे का अडसठवां जन्मदिन होने के कारण अडसठ किलो का केक काटा गया तथा चांदी का मुकुट पहनाकर स्वागत किया गया. साथ ही जन्म दिवस के अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री को तराजू में रुपयों से तोला भी गया जिसके बाद मुख्यमंत्री ने उनके वजन के हिसाब से आए ₹50000 को मंदिर पर ही सेवा कार्य में लगाने के लिए दे दिया।

मंदिर पर मौजूद जनसमूह को संबोधित करते हुए राजे ने कहा कि पूरा राजस्थान छत्तीस बिरादरियों का परिवार है और हम सब इसी परिवार के सदस्य हैं. उन्होंने कहा कि अब हम एक महीने रक्तदान कार्यक्रम चलाएंगे तथा एक हेल्पलाइन नंबर जारी करेंगे जिससे जरूरतमंद गरीब लोगों को रक्त उपलब्ध हो सके. भाजपा सरकार में बनाए गए ब्रज परिक्रमा मार्ग के बारे में बोलते हुए ।

उन्होंने कहा कि इस मार्ग के बनने से क्षेत्र की कायाकल्प हो गई है. अपनी यात्रा के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इसके बारे में मजाक बनाया लेकिन धर्म हमारे जीवन का सार है तथा जनता के परिवार ने मेरी इस यात्रा को सफल बनाया है. क्षेत्र के लोगों द्वारा की गई मेजबानी से राजे बहुत ज्यादा भावुक हो गई एवं तहे दिल से लोगों का आभार व्यक्त किया एवं दोबारा आने की इच्छा प्रकट की. रास्ते में स्वागत के दौरान जो भी चांदी के मुकुट तथा उपहार उनको दिए गए वे उन्होंने केदारनाथ मंदिर में अर्पण कर दिए।

अंधेरा छंटेगा, कमल खिलेगा…

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने अपने जन्म दिवस के अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई की कविता ‘अंधेरा छंटेगा, कमल खिलेगा…’ का वाचन भी किया. साथ ही इस अवसर पर वसुंधरा राजे ने ऐलान किया कि राजस्थान में जल्द ही कमल खिलेगा और हम सब मिलकर इस कमल को खिलाएंगे.

शक्ति प्रदर्शन नहीं, भक्ति प्रदर्शन है…

वसुंधरा राजे ने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ लोग इसे शक्ति प्रदर्शन का नाम दे रहे हैं, लेकिन हकीकत में यह शक्ति प्रदर्शन नहीं बल्कि भक्ति प्रदर्शन है. इस कार्यक्रम में कोई राजनीति नहीं सिर्फ भक्ति नीति है|

सूरत से पधारे श्रीश्यामलाल प्रभु व सप्तम निधि श्रीमदनमोहन प्रभु के छप्पन भोग आयोजित
कामां। सूरत की पुष्टिमार्गीय षष्ठ पीठ के गोस्वामी श्री वल्लभराय महाराज के माथे विराजित श्रीश्यामलालप्रभु व सप्तम पीठाधीश्वर श्री ब्रजेश कुमार महाराज के माथे विराजित श्रीमदनमोहनप्रभु के छप्पनभोग महोत्सव में अपार जन समूह उमड़ा। वृन्दावन कुम्भ पूर्व बैठक से कामवन में श्री श्यामलाल प्रभु पधारे जिन्हें गाजे बाजे ध्वजा पताका निशान व कीर्तन मण्डली की अगुवाई में डीग दरवाजा से सप्तम पीठ में शोभायात्रा के रूप में पधराया गया। उसके बाद दोनों स्वरूपों का भव्य विशाल व अलौकिक छप्पन भोग महोत्सव आयोजित हुआ जिसमे देश विदेश के असंख्य दर्शनार्थियों ने प्रभु के दर्शनों का आनन्द लिया। इस अवसर पर विभिन्न कीर्तनकारों ने अनेक रागों में हवेली संगीत में अष्टछाप के पदों का गायन किया। छप्पन भोग महोत्सव में प्रभु को अनेक प्रकार के व्यंजन भोग पधराये गए। उल्लेखनीय है कि श्रीश्यामलाल प्रभु पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक अखण्ड भूमंडलाचार्य महाप्रभु श्री वल्लभाचार्यजी के सेव्य स्वरूप हैं और वे प्रथम बार कामवन पधारे। छप्पन भोग महोत्सव में प्रभु को विभिन्न प्रकार की सामग्री भोग आईं जिनमें लड्डू, मठरी, गूंजा, सकलपारे, चंद्रकला, मोहन थार, मेवाबाटी, मनोहर, तवापूड़ी, पपची, चुकली, बाबर, गोकुलनाथ शाईमनोहर, बूरापूडी, बासोन्दी, दूधघर, दुधलाअमृत आदि प्रमुख थे। इस अवसर पर बाहर से पधारे सभी वैष्णवों के भोजन प्रसाद की व्यवस्था भी की गई। श्री श्यामलाल प्रभु के सुखपाल को सुसज्जित रथ से उतारकर वैष्णवों ने सुखपाल को अपने कंधों पर उठाकर जयघोष के साथ मंदिर तक पधराया।