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राज्यसभा का रण – बागी बसपा और कांग्रेस विधायको के तेवर पड़े ढीले, कांग्रेस फिर भी सकंट में

जयपुर/ राजस्थान की 4 राज्य सभा सीटों के लिए 10 जून को होने वाले चुनाव को लेकर राजस्थान की राजनीति में मचा घमासान और बसपा के बागी 6 विधायकों तथा कांग्रेस के बागी और नाराज विधायकों को लेकर कांग्रेस और मुख्यमंत्री गहलोत पर संकट के बादल मंडरा रहे थे हालांकि बसपा के 6 विधायकों और कांग्रेस के बागी विधायकों की रात को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ हुई बैठक और मान मनवार के बाद बसपा के सभी 6 विधायकों ने कांग्रेस के बाड़े बंदी में जाने लिए हां कर दी है वहीं कांग्रेस के बागी विधायकों के तेवर भी ढीले पड़े हैं हालांकि कांग्रेसी पर अभी संकट टला नहीं है।

बसपा के नाराज और कांग्रेसी में शामिल हुए छह विधायक राजेंद्र गुढा, लखन सिंह ,वाजिब अली, संदीप यादव, दीपचंद खेरिया, और जोगिंदर अवाना तथा कांग्रेस के बागी खिलाड़ी लाल बैरवा और गिरिराज सिंह मलिंगा तथा संयम लोढ़ा नाराज चल रहे थे ।

देर रात मुख्यमंत्री से पहले अलग-अलग नेताओं के साथ बैठकों के बाद अंत में देर रात मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ दीपचंद खेरिया जोगिंदर अवाना और सःयम लोढा को छोड़कर अन्य के साथ हुई बैठक और मंत्रणा के बाद सभी विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी को मत देने और उदयपुर में कांग्रेस के बाडेबंदी में जाने की रजामंदी दे दी है । बसपा के विधायक दीपचंद खेरिया और जोगिंदर अवाना पहले ही उदयपुर में बाड़े बंदी में हैं।

अब राजनीतिक समीकरण और राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार हमने कल भी लिखा था कि बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने सभी 6 विधायकों को व्हिप जारी करते हुए निर्देश दिए थे कि वह कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान नहीं करेंगे निर्दलीय प्रत्याशी सुभाष चंद्रा के पक्ष में मतदान कर सकते हैं ।

वैधानिक और कानून क्या कहता

वैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत बसपा के सभी 6 विधायकों ने हालांकि एक साल पहले ही कांग्रेसी शामिल होने की घोषणा कर दी थी लेकिन यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित और विचाराधीन है और जब तक नियमानुसार वैधानिक तौर पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय नहीं आ जाता तब तक बसपा के सभी छह विधायक बसपा पार्टी से ही माने जाएंगे और अगर व्हिप का उल्लंघन करते हैं तो उनकी विधायकी खतरे में पड़ सकती है ?

सवाल यह

अब सवाल यह उठता है कि अगर बसपा के सभी छह विधायक व्हिप का उल्लंघन कर कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करते हैं तो बसपा और कानून सम्मत उनकी विधायकी जा सकती है ऐसे में कोई भी विधायक नहीं चाहेगा की उनकी विधायकी जाए तो दूसरी ओर अब राजस्थान में विधानसभा चुनाव को लेकर केवल अब 1 साल 6 महीने बचे हैं ऐसी स्थिति में बसपा के सभी छह विधायक जानते हैं कि अगले साल चुनाव में बसपा उनको टिकट दे या ना दे इसकी कोई गारंटी नहीं है लेकिन बचे हुए 1 साल 6 महीने वह कांग्रेस का साथ देकर अपने आने वाले भविष्य को सुधार सकते हैं और यही सोच कर बसपा के सभी छह विधायक कांग्रेस प्रत्याशी को मतदान करते हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी ।

कांग्रेस और गहलोत अभी भी सकंट मे

हालांकि राजनीति में हर पल और हर दिन समीकरण बदलते रहते हैं राजनीति में स्थिरता नहीं कही जा सकती निर्दलीय भाजपा समर्थित राज्यसभा प्रत्याशी सुभाष चंद्रा के पक्ष में फिलहाल भाजपा के 30 और हनुमान बेनीवाल की पार्टी आरएलपी के 3 विधायकों का समर्थन तो पक्का है अब चंद्रा को विधायकों का जुगाड़ करना है चंद्रा बसपा निर्दलीय और कांग्रेस के बागी विधायकों में कितनी सेंधमारी कर सकते हैं यह मतदान और मतदान के बाद मतगणना पर ही पता चलेगा। हालांकि कांग्रेसी बसपा और 13 निर्दलीय विधायक कांग्रेस के बाडे बंदी में हैं जरूर लेकिन अपना मत कांग्रेस प्रत्याशी को देंगे या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं है कांग्रेस विधायकों को तो व्हिप जारी होने पर अपना मत दिखाकर मतदान करना होगा इसके लिए बाध्य होंगे परंतु 13 निर्दलीय विधायक और बसपा के छह विधायक अपना मत दिखा कर मतदान करेंगे इसके लिए विधि सम्मत वह बाध्य नहीं है ।

Dr. CHETAN THATHERA
चेतन ठठेरा ,94141-11350 पत्रकारिता- सन 1989 से दैनिक नवज्योति - 17 साल तक ब्यूरो चीफ ( भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़) , ई टी राजस्थान, मेवाड टाइम्स ( सम्पादक),, बाजार टाइम्स ( ब्यूरो चीफ), प्रवासी संदेश मुबंई( ब्यूरी चीफ भीलवाड़ा),चीफ एटिडर, नामदेव डाॅट काम एवं कई मैग्जीन तथा प समाचार पत्रो मे खबरे प्रकाशित होती है .चेतन ठठेरा,सी ई ओ, दैनिक रिपोर्टर्स.कॉम