शिक्षक को बालक का सम्पूर्ण ज्ञान होगा तभी वह उसका सर्वांगीण विकास कर पायेगा। राजस्थान जनवादी शिक्षक संघ की ओर से एक नवीन पहल “आमने-सामने”

देवली/दूनी(हरि शंकर माली)। राजस्थान जनवादी शिक्षक संघ की ओर से एक नवीन पहल “आमने-सामने” प्रारम्भ की गयी। “आमने-सामने” नाम के नवाचार रुपी इस कार्यक्रम में राजस्थान जनवादी शिक्षक संघ के पदाधिकारी राज्य के ऐसे सेवानिवृत एवं सेवारत शिक्षकों से  संवाद स्थापित करेंगे जिन्होंने नवाचारों के साथ शिक्षा-क्षेत्र में अनुपम योगदान दिया है।इसका उद्देश्य अतीत और वर्तमान के अनुभवों का एक साझा दस्तावेज़ तैयार करना है। प्रवक्ता देवेंद्र भारद्वाज ने बताया कि इस नवाचार की शुरुआत आवां ग्राम के सेवानिवृत शिक्षक श्री प्रेमशंकर सोमाणी के साथ बातचीत से की गयी है।इस बातचीत में संघ की ओर से प्रतिनिधि मंडल में अंशुल शर्मा, लखमाराम मीणा, रेखा मीणा और मीना चंदेल ने भाग लिया। श्री सोमाणी से शिक्षक संगठनों की भूमिका ओर कार्यप्रणाली तथा वर्तमान एवं प्राचीन शिक्षा प्रणाली पर बातचीत की गयी। श्री सोमाणी ने सभी बिंदुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि एक शिक्षक कभी सेवानिवृत नहीं होता।

शिक्षा प्रणाली के तीन मुख्य आधार हैं – शिक्षार्थी, शिक्षक और अभिभावक। इन तीनों का एक सूत्र में बंधना बहुत आवश्यक है। शिक्षक को बालक का सम्पूर्ण ज्ञान होगा तभी वह उसका सर्वांगीण विकास कर पायेगा और यह तभी संभव है जब शिक्षक अपने आप को उस बालक से, उसके परिवार से, उसके समाज से और उसके गाँव से जोड़े।

श्री सोमाणी ने राजस्थान जनवादी शिक्षक संघ को इस तरह के कार्यक्रमों के संचालन की बधाई देते हुए कहा कि इस तरह के सकारात्मक कार्यक्रमों के आयोजन की अत्यंत आवश्यकता है।

अंशुल शर्मा ने बताया कि राजस्थान जनवादी शिक्षक संघ के माध्यम से इस तरह के नवाचार आगे भी किये जाते रहेंगे।