टॉफी की लालच ने नरपत सिंह राजपुरोहित को गोल्डन बुॅक ऑफ वर्ल्ड रिकार्डधारी बना दिया

Tonk News /चंचल कुमार रैगर । ललच बहुत बुरी बला हैं । लालच में आदमी क्या से क्या कर गुजरता है। लालच भी मिला तो मात्र मीठी टॉफी का । टॉफी खाने के लालची को एक गुरूजी ने ही अपने चेले को पर्यावरण प्रेमी बना दिया। ग्रीनमेन टॉफी के लालची को गोल्डन बुॅक ऑफ वर्ल्ड रिकार्डधारी बना दिया। पर्यावरण प्रेमी ने बढ़ते औद्योगिकीकरण सहित अन्य प्रदूर्षण से बिगडते पर्यावरण को संतुलित बनाये रखने के लिए पेड़ पौधे लगाने का ऐसा जनूनी बना दिया कि आज वो अपने वेतन तक का आधा भाग स्वैच्छिक रूप से पर्यावरण संतुलित करने के लिए नीजि पैसे सार्वजनिक भूमि पर स्वयं जाकर पेड़ पौधे लगाता हैं एवं लोगों को पेड़ पौधे खरीद कर अपने घरों में खाली भूमि पर लगाने के लिए देकर हरियालों राजस्थान बनाने में मदद कर अपनी अहम भूमिका निभा रहा है वो शख्शियत हैं नरपत सिंह राजपुरोहित।

 


नरपत सिंह राजपुरोहित का नाम आज किसी परिचय का मोहताज नही हैं। नरपत सिंह राजपुरोहित को आज जन जन उसे अपने नाम से न पुकार कर पर्यावरण प्रेमी, ग्रीनमेन के नाम से जाने एवं पहचाने जाने लगें है। यह मूलतः बाडमेर जिले के करणसिंह राजपुरोहित निवासी लंगेरा कोजाणियां की ढ़ाणी निवासी के यहां जन्मे है तथा वर्तमान में निवाई में निवास करते हैं। पर्यावरण प्रेमी नरपत सिंह राजपुरोहित ने लगभग आधे हिन्दूस्तान में साईकिल से भ्रमण कर ना कभी गर्मी की ंिचंता की ना कभी हांडकंपा देने वाली सर्दी की ना बरसात की । बस उसका तो एक ही मिशन था कि मैं जन जन को पर्यावरण संतुलित बनाये रखने का संदेश दूं ताकि इस वैज्ञानिक युग मंें बढ़ते औद्योगिकीकरण सहित अन्य से बिगडते पर्यावरण को बचाये रखने का अलख जग सके ।


पुरोहित ने अब तक पर्यावरण बचाये रखने के लिए अलख जगाते हुए लगभग 83 हजार पेड़ पौधे अपने नीजि पैसे से व्यय कर लगा चुका हैं। टॉफी की लालची पर्यावरण प्रेमी ने पहली बार पर्यावरण को बचाये रखने के लिए जन जन को संदेश देने के लिए 500 किलोमीटर की साईकिल यात्रा का 9 अप्रेल 2017 को बीडा उठाया जो उदयपुर से प्रस्थान कर राजसंमद,पाली, जोधपुर होते 5 दिन में यात्रा पूरी की । इस दौरान वह कई महकमो के अधिकारियों एवं आमनागरिकों को अपने बंगले एवं घरों में पेड़ पौधे खरीद कर लगाने के लिए दिये ।

 


इसी प्रकार दूसरी साईकिल यात्रा 200 किलोमीटर की जोधपुर से बाडमेंर तक की एक सितम्बर 2017 को प्रारंभ की जो महज 9 घंटे में पूरी की । पर्यावरण संतुलन का अलख जगाने के लिए तीसरी साईकिल यात्रा एक दिसम्बर 2017 को 4000 किलोमीटर लम्बी यात्रा की जो जम्मू प्रेस क्लब से प्रांरभ कर 6 राज्यों जिनमें जम्मू कश्मीर, पंजाब,हिमाचल प्रदेश,हरियाणा,राजस्थान होते गुजरात के कच्छ के रण तक 4 जनवरी 2018 को 35 दिन में समाप्त की । इस यात्रा मंे नरपत सिंह राजपुरोहित ने राजस्थान सरकार के जल संरक्षण, बेटी बचाओं, बेटी पढ़ाओं,का अलख जगाकर संदेश दिया । इस दौरान राजपुरोहित ने पेड़ पौधों के चित्र अंकित की हुई एवं स्लोगन लिखी अपनी पोैषाक पहन कर शहर शहर,मुख्य चौराहों,स्कूलों, महाविद्यालयों,थानों अस्पतालों घूम घूम कर पर्यावरण संतुलित करने का संदेश दिया। इसके साथ हर विभाग में स्कूलों में अध्ययनरत बालक बालिकाओं के हाथों पेड़ पौधे लगाकर हरियालों राजस्थान का संदेश दिया। इस दौरान 950 पेड़ पौधे नीजि धन से क्रय कर लोगों को लगाने के लिए दिये।


नरपत सिंह राजपुरोहित ने चौथी साईकिल यात्रा का श्रीगणेश 27 जनवरी 2019 को किया। इस यात्रा मूल उद्देश्य था राजस्थान सरकार का जल संरक्षण जागरूकता । जो विश्व की सबसे लम्बी साईकिल यात्रा थी जो हिन्दूस्ता ने 14 राज्यों एवं 4 केन्द्र शासित प्रदेशों में होकर जल संरक्षण का अलख जगाती 21 हजार 221 किलोमीटर चलते हुए वर्ल्ड गिनीज बुॅक में अपना नाम अंकित करवाने का संदेश का मेल कर तमिलनाडु के होसुर शहर में कोरोना संकट को दृष्टिगत रखते हुए कुछ समय के लिए विराम दे दिया गया है। अब तक नरपत ंिसंह राजपुरोहित गोल्डन बुॅक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में अपना नाम अंकित करवा चुका है। उसके जीवन का मकसद केवल और केवल मात्र पर्यावरण संरक्षण,जल संरक्षण हैं। पुरोहित दर्जनों मौअजिज राजनेताओं के कर कमलों से अवार्ड प्राप्त कर चुके है।
नरपत सिंह राजपुरोहित ने पर्यावरण के साथ वन्यजीव सरंक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया हैं। अब तक के अल्पकाल में ही 136 हिरण राज्य पशु चिंकारा, 3 मोरनी, 5 मोर, 4 ख़रगोश, 1 बाज, 1 नील गाय सहिए एक बड़ा उल्लू उपचार करवा कर असमय मौत से बचाया गया । बाद स्वस्थ होने पर जंगल में विचरण के लिए छोड़ा गया। यही नही किसी भी ग्रामीण के वन्य जीव या पक्षियों के घायल होने पर वे नीजि खर्च पर पहुंच कर घायल का नीजि धन से उपचार करवा कर स्वस्थ होने पर उसे खुले आकाश में छोडते है। इसके अतिरिक्त वन्यजीवों की आवक जावक स्थानों पर 17 ऐसे स्थान चिन्हित कर वन्य जीवों के पानी की खेले रखवा कर उनमें पेयजल की माकूल व्यवस्था करवाई गई। वही 2 शिकारियों को हवालात तक पहुंचाने का काम किया ।
राजपुरोहित ने अपना सम्पूर्ण जीवन ही पर्यावरण संरक्षण,जल संरक्षण वन्य जीव संरक्षण में ही होम दिया । तभी तो ’’ आओं मिलकर पक्षियों को बचाये’’ पोस्टर का नीजि खर्चे पर प्रिंट करवा कर विमोचन करवा कर जन जागृति अभियान का श्रीगणेश किया गया। यहीं नही अपनी सहोदर बहिन की शादी में कन्यादान में बतौर 251 विभिन्न किस्म के पौधे देकर विदाई की । इसी प्रकार’ राजपुरोहित ने मानव प्राणी के कल्याण के लिए ’’ नर सेवा को ही नारायण सेवा ’’ मानते हुए अब तक 16 बार रक्तदान कर पीड़ित मानव की सेवा करने में पीछे नही रहे।