#संपादकीय #बचना अपने हाथ! नही सम्भले तो पड़ेगा पछताना # कोरोना महामारी

Deoli News।  पहले को-रोना….अब जीने के लिए रोना! कोंन सा रास्ता अच्छा है,ये तय करना सबका काम है. जीना ज्यादा जरूरी है….सरकार ने अनलॉक 0.1 किया है तो इसका मतलब ये नही कि कोरोना चला गया है! सावधानी रखनी है और रोजमर्रा की जिंदगी से भी जूझना है…..सरकार धीरे- धीरे खोलना चाह रही है! मतलब …

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June 11, 2020 3:48 pm
Deoli News।  पहले को-रोना….अब जीने के लिए रोना! कोंन सा रास्ता अच्छा है,ये तय करना सबका काम है. जीना ज्यादा जरूरी है….सरकार ने अनलॉक 0.1 किया है तो इसका मतलब ये नही कि कोरोना चला गया है! सावधानी रखनी है और रोजमर्रा की जिंदगी से भी जूझना है…..सरकार धीरे- धीरे खोलना चाह रही है! मतलब सीधा है प्रभाव को भी देखना है और विश्लेषण करते हुए शने-शने सब खोलना भी है….
राज्य में कैंटोनमेंट को छोड़कर सब खोलना हालांकि जोखिम भरा तो है पर ओर कोई चारा भी नही बचा है सरकारों के सामने! आवाजाही बढ़ेगी तो संक्रमण भी एक स्थान से दूसरे स्थान पर बढ़ेगा ये तय है! जो स्थान अब तक अछूते बचे थे अब शायद वहाँ भी इसकी शुरुआत होजाये,ऐसी संभावना है….देवली शहर बूंदी, कोटा, अजमेर, भीलवाड़ा की सीमाओ से सटा है…यातायात केंद्र की वजह से यहां भी अब संक्रमण की सम्भावनायें बढ़ी है! दुपहिया, चो पहिया वाहन बाहरी जिलों से बड़ी मात्रा में आरहे है….
ऐसे में ये तय करना मुश्किल होगा कि ये बला कहां से आई! देवली शहर बचा रहे तो सभी गतिविधियों को सीमित रखना ही होगा…व्यापारी बन्धु भी समय रहते व्यवसायी गतिविधियों को समेट ले तो बेहतर होगा..जितना समय गतिविधियों को जारी रखा जाएगा उतना ही जोखिम पूर्ण होगा… थोड़ा धैर्य और सयंम रखे.अवसर बहुत मिलेंगे और सब्र तोड़ी तो फिर भोगने के लिए तैयार भी रहना होगा! निर्णय आपके, हमारे और सबके हाथ है!……

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