उदयपुर में एक ऐसा अजूबा जिसको देख आप भी रहें जाएगे दंग

Udaipur news । आपने भारी वर्षा में हैंडपम्प, सड़कों को पानी में डूबते हुए देखा होगा, लेकिन हम आपको ऐसा अजब-गजब अजूबा बताने जा रहे हैं जिसे आपने शायद ही कभी देखा हो। बिना भारी बारिश के ही हैंडपम्प डूब जाए तो कैसा रहे। जी हां, उदयपुर जिले के एक ग्रामीण क्षेत्र में ऐसा ही हुआ है और हैंडपम्प पानी में नहीं, बल्कि सड़क में डूब गया है और जिस तरह पानी में तैरते समय गर्दन बाहर रहती है जिससे व्यक्ति सांस ले सकता है, उसी तरह हैंडपम्प की सिर्फ गर्दन बाहर नजर आ रही है, उसका हत्था भी डूबा हुआ है।

इस नजारे को देखकर एक सामान्य आदमी के मन में तीन सवाल उठेंगे। पहला यह कि एक तो हैंडपम्प इतना कैसे सड़क में डूब गया, दूसरा यह कि क्या ठेकेदार इतना मजबूत था कि उसने सड़क में इतनी ग्रेवल भर दी और सड़क को इतना ऊंचा उठा दिया और तीसरा यह कि 2016 से शुरू होकर 2017 में पूरी हुई इस सड़क पर कोई जिम्मेदार अधिकारी या जनप्रतिनिधि नहीं गुजरा जिसकी नजर इस पर बिल्कुल नहीं पड़ी।

इस नजारे को जब भी उधर से गुजरने वाले ग्रामीण देखते हैं वे नीचे से ऊपर तक किसी को भी कोसने से नहीं बख्शते और आखिर में यही कहते हैं कि भारत में यही सिस्टम है, किसको सुनाएं और कौन सुने? बस यह जुमला कहते हैं और एक छोटा सा ठहाका मारते हैं कि कम से कम किसी ने यहां से गुजरने वालों को मुस्कुराने का मौका तो दिया।

आपको बता दें कि झूंथरी से रेनलाफला की यह सड़क प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी है। इसका कार्य 24 सितम्बर 2016 को शुरू हुआ और 25 जुलाई 2017 को पूरा हुआ। इसकी पांच साल की गारंटी है जिसकी तिथि 25 जून 2022 तय की गई है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के निर्देशन में हुए इस कार्य को एक ऐसे ठेकेदार ने किया है जो डबल ए श्रेणी का है। और तो और यह सड़क खेरवाड़ा पीडब्ल्यूडी डिवीजन के कार्यालय से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर झूंथरी पंचायत में है। इसकी लागत एक करोड़ 66 लाख रुपये आई है।

फिलहाल अब जागरूक ग्रामीणों का कहना है कि बीच सड़क पर हैंडपम्प होने से हमेशा सड़क दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। रात में कोई तेज रफ्तार गाड़ी अगर बीच सड़क पर लगे हैंडपंप से टकरा जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। इस बारे में जब हमने बोर्ड पर लिखे अधिकारियों के नंबर पर बात करनी चाही तो सभी पल्ला झाड़ रहे हैं।

नियमों की बात करें तो सड़क निर्माण की शुरुआत से लेकर कार्य पूर्ण होने तक जेईएन से लेकर चीफ इंजीनियर तक के अधिकारियों की निर्धारित विजिट होनी चाहिए और हुई भी होगी, लेकिन डूबा हुआ हैंडपम्प किसी को नजर नहीं आया।