सफ़ेद झूठ: फर्जी तरीके से किया गया टोंक शहर को ओडीएफ घोषित,खुले में शौच से मुक्त नहीं हुआ है शहर, तालाब के किनारे और बबूलों की ओट बने संडास

Tonk News (भावना बुंदेल) कुछ समय पूर्व विज्ञापनों के माध्यम से कागजों में शहर को खुले में शौच से मुक्त घोषित करने का कारनामा नगर परिषद कर चुकी है। उस वक़्त शहर के 45 वार्डों को फर्जी रिपोर्टिंग के जरिए ओडीएफ घोषित कर नगर परिषद ने खुद की पीठ स्वयं ही थपथपाई थी। हकीकत यह है कि गरीब लोगों के इस शहर को खुले में शौच से मुक्ति दिलाने में बरसों लगेंगे। स्वच्छ भारत मिशन योजना शहर में बिल्कुल फेल रही है, जबकि नगर परिषद योजना को सफल बताकर शासन और प्रशासन की आंखों में धूल झौंकने का काम कर चुकी है। बिना किसी सर्वे और सत्यापन के कागजों में शहर को ओडीएफ बना चुकी नगर परिषद का सरासर फर्ज़ीवाड़ा दांतों तले ऊँगली दबाने को मजबूर कर देता है।


खुले में शौच का क्रम बदस्तूर जारी


तकरीबन शहर के हर वार्ड में बेखौफ विचरण करने वाले सूअरों का भोजन मुख्यत: मानव मल ही है। अकेले सूअर ही स्वच्छ भारत मिशन की रिपोर्टों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी हैं। आखिर उनकी वंश वृद्धि का प्रमुख आधार मानव मल और गन्दगी ही है, जिसकी बदौलत उन्होंने शहर को नरक बनाकर रख दिया है। शहर की आबादी का बड़ा हिस्सा गरीबी की रेखा के नीचे गुजर- बसर करता है। मेहनत- मजदूरी करकेे दो वक्त की रोटी कमाने वाले लोगों की हालत यह है कि उन्हें रोज कुआं खोदना और पानी पीना पड़ता है। शहर में अभी भी हजारों शौचालय ऐसे हैं, जिन्होंने अपने पाइप सीधे ही नालियों में छोड़ रखे हैं। टैंक नहीं होने के कारण मानव मल नालियों में बहता रहता है। शहर में तेलियों का तालाब, धन्ना तलाई, रेडियावास तालाब, चतुर्भुज तालाब समेत सारे जल के स्रोत खुले में शौच जाने वालों के लिए वरदान साबित हुए हैं, जहां वे प्रतिदिन तालाबों के किनारे शौचादि से निवृत्त होते हैं।


बेघर लोगों से शौचालय की उम्मीद बेमानी


शहर की कच्ची बस्तियों में खुले आसमान के नीचे डेरे- तम्बुओं में रहने वाले कलन्दर और मिरासी समुदाय के लोगों से शौचालय की बात भी करना उनकी गरीबी का मजाक उड़ाने जैसा है। भोपा बस्ती के लोग भी जैसे- तैसे गुजर- बसर करते हैं। बहीर बस्ती में रहने वाले कलन्दरों के पास रहने को कच्चे घर तक नहीं है, इनमें से कई लोग तो रोटी- रोजगार के अभाव में भिक्षावृत्ति करके अपना जीवन- यापन कर रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए शौचालय का ख्याल भी सपने जैसा है। गौरतलब है कि शहर की दलित बस्तियों में रहने वाले कई गरीबों की शौच निवृत्ति का माध्यम शहर के बबूल, दूरवर्ती निर्जन स्थल और तालाब बने हुए हैं। एक मुद्दत से खुले में शौच करने में शहर के कई परिवार अभ्यस्त हो चुके हैं। नगर परिषद ये बात अच्छी तरह जानती है कि उसके समीप तेलियान तालाब में प्रतिदिन सैकड़ों की तादाद में लोग खुले में शौच करते हैं। इसके बावजूद नगर परिषद कागजी खानापूर्ति कर शहर को ओडीएफ घोषित कर चुकी है ताकि फर्जी आंकड़े पेश कर उच्चाधिकारियों और सरकार को मूर्ख बना सके।