कोटा थर्मल कार्मिकों को 9 माह से ओवरटाइम नहीं

राज्य विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ ने मुख्य अभियंता को दिया ज्ञापन-

Kota News। राज्य विद्युत उत्पादन कर्मचारी संघ ने कोटा सुपर थर्मल पावर प्लांट के मुख्य अभियंता वी.के. गोलानी से मांग की कि थर्मल के तकनीकी कर्मचारियों को पिछले 9 माह से बकाया ओवरटइम तथा उत्पादकता प्रोत्साहन अवार्ड की बकाया 10 प्रतिशत राशि का भुगतान तत्काल प्रभाव से कराया जाये। कोटा इकाई के अध्यक्ष रामसिंह शेखावत ने बताया कि कोटा थर्मल में कार्यरत कर्मचारियों को गत वर्ष अप्रैल से दिसंबर तक 9 माह के ओवरटाइम भुगतान नहीं किया गया है। इस हेतु वे पूर्व में भी प्रबंध निदेशक तथा मुख्य वित्त अधिकारी को भी पत्र लिख चुके हैं।

संघ के महामंत्री अरविंद आचार्य ने बताया कि कोटा थर्मल की सातों इकाइयां पूरी क्षमता से बिजली उत्पादन करने में सक्षम हैं लेकिन लोड डिस्पेच सेंटर द्वारा चालू इकाइयों को जल्दी-जल्दी बंद कर देने से कोटा थर्मल को आर्थिक नुकसान होने के साथ ही प्लांट की महत्पूवर्ण लोकेशनों पर भी निरंतर जोखिम बढती जा रही है।

जोखिमपूर्ण लोकेशन ठेके पर क्यों –

शेखावत ने थर्मल प्रशासन द्वारा प्लांट में ठेका प्रणाली को प्रोत्साहन देने की नीति का कडा विरोध करते हुये बताया कि पिछले दिनों कोल हेंडलिंग प्लांट के सम्पूर्ण कार्य संचालन की निविदा एक ठेकेदार को देकर प्लांट के अनुभवी तकनीकी कर्मचारियों को वहां से हटा दिया गया है। जिसके कारण रेलेवे वेगन से कोयला खाली करते समय वेगन ट्रिपलर पर गंभीर दुर्घटनायें होती रहती हैं। ठेकेदारों की मिलीभगत से प्लांट की जोखिमपूर्ण लोकेशनों को अप्रशिक्षित ठेका श्रमिकों के हाथों में सौंप देने से कोटा थर्मल में असुरक्षा का वातावरण बना हुआ है। उन्होंने मांग की कि 1240 मेगावाट क्षमता के कोटा ताप बिजलीघर में निर्धारित मापदंडों के अनुसार आईटीआई प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों को ही प्लांट ऑपरेशन में नियुक्त किया जाये अन्यथा किसी भी बडी दुर्घटना के लिये थर्मल प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।

संघ के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य अभियंता से वार्ता कर थर्मल कर्मचारियों एवं अभियंताओं को उत्पादकता अवार्ड की शेष बकाया 10 प्रतिशत राशि का भुगतान जल्द करवाने की मांग की। उन्होंने कहा कि केंद्र व राज्य सरकार ने कोरोना महामारी के नाम से पिछले एक वर्ष से महंगाई भत्ते पर रोक लगाकर कर्मचारियों की आर्थिक परेशनी बढा दी है। राज्य के मुख्यमंत्री कोष में 15 दिन के स्थगित वेतन का भुगतान भी नहीं किया जा रहा है। जबकि जनप्रतिनिधियों को सभी वेतन भत्ते नियमानुसार समय पर मिल रहे हैं। सरकार की इस दोहरी नीति से कर्मचारियों में भारी आक्रोश है।