बर्ड फ्लू की दस्तक के बाद अब हिमाचल के वन्य प्राणी विंग ने राजस्थान को बर्ड फ्लू के लिए चेताया

Bird flu
file photo

Jaipur News । राजस्थान के झालावाड़ में बर्ड फ्लू (Bird flu)की दस्तक के बाद अब प्रदेश के आधा दर्जन से अधिक जिलों में स्थानीय प्रशासन, पशुपालन विभाग, वन विभाग समेत अन्य एजेन्सियां सतर्क हो गई है। इस बीच, हिमाचल प्रदेश की वन्य प्राणी विंग ने पौंग झील में प्रवासी परिन्दों की मौतों के बाद राजस्थान समेत पड़ोसी राज्य पंजाब, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, उत्तराखंड व दिल्ली समेत कई राज्यों को अलर्ट जारी किया है। अलर्ट में कहा गया है कि इन पक्षियों में एक नई किस्म के बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई है। हिमाचल में पाया गया बर्ड फ्लू सामान्य फ्लू नहीं है, यह पक्षियों से इन्सान में भी फैल सकता है। राज्यों से अपने राज्यों में प्रवासी पक्षियों की गतिविधियों पर नजर रखने को कहा गया हैं।

 

 

हिमाचल प्रदेश की पौंग झील में बर्ड फ्लू से प्रवासी पक्षियों की मौत का आंकड़ा 2000 पार कर गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बर्ड फ्लू का वायरस मुर्गियों में भी पाया गया तो यह सबसे बड़ा खतरा बन जाएगा। मुर्गियों से इंसानों में वायरस फैलने की अधिक संभावना रहती है। शीतकालीन प्रवास के लिए हजारों की संख्या में विदेशी पक्षी इनदिनों राजस्थान में आए हुए हैं। अब इनमें भी वायरस का डर सताने लगा है। सांभर झील त्रासदी के समय भी सबसे अधिक विदेशी पक्षी ही महामारी की चपेट में आए थे।
जानकारों की राय में यह बीमारी इंसानों में मुर्गियों और संक्रमित पक्षियों के बेहद पास रहने से होती है। यह वायरस इंसानों में आंख, नाक और मुंह के जरिए प्रवेश करता है। एवियन इन्फ्लूएंजा एस5एच1 नाम का यह वायरस काफी खतरनाक होता है और यह इंसानों की जान तक ले सकता है। राजस्थान में अब तक 471 कौओं समेत 522 पक्षियों की मौत हो चुकी है। सोमवार को भी छह जिलों में 140 कौओं की मौत हुई।
राजस्थान के झालावाड़ में सबसे पहले कौओं में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। झालावाड़ के बाद बारां, जयपुर, कोटा, पाली और जोधपुर में भी लगातार कौओं की मौत के मामले सामने आ रहे हैं। कौओं की मौत के बाद जांच के लिए सैंपल पशु रोग संस्थान भोपाल भेजे गए हैं। झालावाड़ में हुई कौओं की मौत में एवियन इनफ्लुएंजा की पुष्टि हुई है। पशुपालन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में मृत पक्षियों के शवों का वैज्ञानिक रूप से निस्तारण करने में जुटा है। बीमार पक्षियों का उपचार किया जा रहा है।

 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि बर्ड फ्लू के सभी स्ट्रेंज घातक होते हैं। यह संक्रमण इंसानों में भी फैलने का खतरा रहता है। झालावाड़ में प्रदूषित वातावरण भी संक्रमण की वजह मानी जा रही है। मृत जीव से यह संक्रमण जल्दी फैलता है। जब एक कौए की मौत हो जाती है तो काफी संख्या में अन्य कौए वहां एकत्रित हो जाते हैं, जिससे संक्रमण दूसरे कौओं में फैल जाता है। जानकारों के मुताबिक बर्ड फ्लू देश में पहली बार 2006 में महाराष्ट्र और गुजरात में फैला था, तब 10 लाख पक्षियों की मौत हुई थी। देश में अब तक 49 बार अलग-अलग राज्यों में यह बीमारी फैल चुकी है। अक्टूबर 2016 और फरवरी 2017 के दौरान देश के 9 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 6 जून 2017 में भारत के कृषि मंत्रालय ने एवियन इनफ्लुएंजा एच 5, एन 8 और एच 5 एन 1 से मुक्त घोषित किया और इसकी सूचना भी विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन को दी गई थी। आखिरी बार कर्नाटक के बीदर जिले के हुमनाबाद में बर्ड फ्लू के मामले सामने आए थे। इसे फैलने से रोकने के लिए 1 किलोमीटर की परिधि में आने वाले इलाकों में पक्षियों को मारने और साफ-सफाई का काम किया गया था।

अब तक झालावाड़ में 100, कोटा में 48, बारां में 72, पाली में 19, जोधपुर में 13, गंगापुर में 20, सवाईमाधोपुर में 22 और जयपुर में 51 कौओं की मौत के साथ बीकानेर समेत कई जिलों में परिन्दों की मौतें हो चुकी हैं।