राजस्थान में भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डाॅ पूनिया की रणनीति के आगे कांग्रेस धराशाही

Jaipur News । प्रदेश के 21 जिलों की जिला परिषदों व पंचायत समितियों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अच्छा प्रदर्शन किया। भाजपा संगठन के बेहतर बूथ प्रबंधन ने कांग्रेस सरकार को चिंतन करने मजबूर कर दिया है। भाजपा के संगठन महामंत्री चंद्रशेखर और प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने अस्वस्थ होने के बाद भी वर्चुअल माध्यम से लगातार कार्यकर्ताओं की बैठकें ली और फीडबैक के आधार पर रणनीति बनाते गए। इसके विपरित राज्य में सरकार होने के बाद भी कांग्रेस का प्रभाव नीचे तक दिखाई नहीं दिया। कांग्रेस ने चुनावों का पूरा दारोमदार स्थानीय विधायकों पर छोड़ दिया। इसके विपरित भाजपा ने पूरी कमान संगठन के हाथों में रखी। बूथ स्तर बैठकें कर मतदाताओं को भाजपा का पक्ष समझाने में कामयाब रहे।

राजस्थान के गांव की सरकार चुनने वाले किसान ही है, लेकिन दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन का प्रभाव चुनावों में कहीं नहीं दिखा। इससे यह साफ हो गया है दिल्ली में चल रहा किसान आंदोलन का असर देश के अन्य क्षेत्रों में नहीं है। ना ही केन्द्र सरकार के नये कृषि कानूनों का विरोध है।

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष डॉ. पूनियां कहते हैं कि गहलोत सरकार ने परिसीमन में धांधली, धर्म की आड़ में जोड़ तोड़ से वोटों की रोटियां सेंकने की जुगत में सत्ता के सहारे सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से सत्ता बल, धन बल के जरिए पंचायतीराज पर एकतरफा काबिज होने के कांग्रेस की अशोक गहलोत सरकार को मुंह की खानी पड़ी है। भाजपा के कार्यकर्ताओं का परिश्रम बल भारी पड़ा, बड़ी-बड़ी डींगे हांकने वाले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के गृह क्षेत्र में कांग्रेस की हार हुई है। जनता का कांग्रेस के दो साल के कुशासन और जनविरोधी नीतियों से मोहभंग हो गया है। यह तो आगाज़ है, ना सत्ता, ना पूंजी, ना चेहरा, बस एक साल के संगठनात्मक परिश्रम का सुखद परिणाम है। सत्ता बल के आगे भाजपा के कार्यकर्ताओं का पसीना जीता है।

पूनियां ने कहा कि यह जीत भाजपा के ग्रामीण विकास, मोदी जी की नीतियों के प्रति विकसित सोच, कार्यकर्ताओं के प्रयासों की जीत है। यह जीत ऐसे समय में हुई हैं, जब मोदी जी की किसानों के प्रति नीतियों के खिलाफ भारत बंद करवा रही थी। भाजपा के दफ्तर पर अशोक गहलोत जी के गुंडे पथराव कर रहे थे। चुनाव बाद आए नतीजों से ऐसा लगता है कि भारत बंद तो दूर कांग्रेस पार्टी के नेताओं की दुकानें जरुर बंद हो गई। ये साबित हो गया कि कांग्रेस पार्टी के 2 साल के कुशासन में भ्रष्टाचार, अराजकता, अकर्मण्यता, बिगड़ी कानून व्यवस्था, किसानों की कर्जामाफी, बिजली के बिल, फीसमाफी के मुद्दों पर प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। बड़बोले पीसीसी चीफ के गृह क्षेत्र में उनकी हार हुई है। एक्स पीसीसी चीफ, स्वास्थ्य मंत्री समेत अन्य मंत्रियों के घरों में हार हुई है। इससे साबित हो रहा है कि कांग्रेस पार्टी अब राजस्थान में दम तोड़ रही है।