सरकार गिराने बनाने की तीसरी घटना

Jaipur News /सत्य पारीक वरिष्ठ पत्रकार । 1966-67 जैसी राजनीतिक घटना राज्य में दुबारा नहीं हुई , जिसमें मोहन लाल सुखाड़िया ने अल्पमत की सरकार का गठन किया , राष्ट्रपति शासन लगा , फिर कुछ दिनों बाद राष्ट्रपति शासन हटा कर सुखाड़िया पुनः मुख्यमंत्री बने , इस राजनीतिक घटनाक्रम में बड़ी चौपड़ की विशाल प्रदर्शन पर गोलियां चलाईं गई जिसमें नेताओं के कोई चोट नहीं लगी मग़र छह निर्दोष लोगों की हत्या हो गई , जिसके एकमात्र चश्दीद पत्रकार अन्नू थपलियाल थे जिन्हें आर्थिक लालच दिया गया था मगर वे पलटे नहीं आखिर में एक सदस्य जस्टिस बेरी आयोग गठित किया गया जिसकी रिपोर्ट वर्षों बाद आई ।

लेकिन सुखाड़िया की विपक्ष के साथ मिलीजुली कुश्ती का राजनीतिक फॉर्मूला होने से किसी का कुछ नहीं बिगड़ा , तब अल्पमत-बहुमत का एक मात्र खिलाड़ी विधायक थे समर्थ लाल मीणा , उसके बाद बेरी आयोग राज्य का एक स्थायी आयोग बन गया जिसका कार्यालय जे एल एन मार्ग पर स्थायी बन गया , एक कहावत चल पड़ी कि ज्वलंत मुद्दों की जांच बेरी आयोग को सौंप दो मुद्दा ठण्ठे बस्ते में , बेरी आयोग की जांच एक रिकार्ड है ।

दूसरी राजनीतिक घटना 1996 में घटी जब जनता दल विधायक भंवरलाल शर्मा ने हरियाणा के मुख्यमंत्री भजनलाल ( परसराम मदेरणा की सरकार गठित करने में असफल रहे ) के सहयोग से भैरोसिंह शेखावत की जोड़तोड़ की सरकार गिराने की कोशिश की , राज्यमंत्री पुंजालाल का इस्तीफा दिलाया था , गोपीचन्द गुर्जर के साथ आधा दर्जन विधायक और थे , उस घटना में शामिल पूर्व विधायक भैरुं सिंह गुर्जर i चश्दीद हैं , इस घटनाक्रम में परसराम मदेरणा ने बागियों का साथ देने से स्पष्ट मना कर दिया था , हालांकि मदेरणा को मुख्यमंत्री पद की पेशकश की गई थी , जिसे उन्होंने ठुकरा दिया ये कह कर बीमार की पीठ में छुरा नहीं ।

तीसरी घटना अभी चल रही है जिसके कर्ताधर्ता सचिन पायलट के साथ गजेन्द्र सिंह शेखावत हैं , इसमें तीन मंत्री के पद जा चुके , सबसे बड़ा बाड़ेबंदी का खेल चल रहा है जिसका एंडिंग पाइंट लगभग 17 अगस्त तक होगा , मौजूदा घटनक्रम राजस्थान के इलावा हरियाणा व दिल्ली तक में फैला है , इस राजनीतिक घटनाक्रम में पुलिस के साथ न्यायालय की भी अहम भूमिका है ।