कांग्रेस विधायक ने डीआईजी गौड पर लगाए गंभीर आरोप, गिरफ्तारी की मांग, घूसकांड से सियासी तूफान

Jaipur news । प्रदेश मे भरतपुर डीआईजी के नाम से थानेदारो से वसूली करने वाले घूसकांड ने प्रदेश मे सत्ता पक्ष कांग्रेस के एक विधायक ने डीआईजी के खिलाफ बगावत करते हुए सियासी भेचाल ला दिया है तो वही पुलिस महकमे भी इस कांड को लेकर त चक्रवाती तूफान आया हुआ है । सरकार ने डीआईजी लक्ष्मण गौड को हालाकी एपीओ कर दिया है लेकिन कांग्रेस विधारक अब गौड की गिरफ्तार की मांग पर अड गए है तो वही भरतपुर रेंज के सभी थानेदारो की सूची बना उनको संदेह के दायरे मे लेते हुए पूछताछ की जाएगी ।

विदित है की ट्यूर एंड ट्रावेल्स के मालिक प्रमोद शर्मा को थीन दिन पूर्व एसीबी ने जयपुर में एक मिठाई की दूकान के यहां से भरतपुर के उधोग थाना प्रभारी चन्द्र प्रकाश से 10 लाख रूपये गौड के नाम पर प्रमोद शर्मा ने मागे थे और सीआई की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए शर्मा को 5 लाख की नकदी सहित गिरफ्तार किया था।

शर्मा अभी न्यायिक अभिरक्षा में है ।दूसरी और धौलपुर की बाडी विधानसभा से कांग्रेस के तेज तर्रार विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा के डीआईजी लक्ष्मण गोड को गिरफ्तार कलने की मांग मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से की है । विधायक की इस मांग से पुलिस महकमे में सनसनी फैली गई है ।

बाड़ी विधायक गिर्राज सिंह मलिंगा का कहना है कि डीआईजी लक्ष्मण गोड जिले के थानों में पुलिस कर्मियों को लगाकर अवैध बजरी की निकासी कराते थे। जब उनके दलाल प्रमोद शर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है, तो डीआईजी गोड को क्यों नहीं गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पूरे संभाग के पुलिस सिस्टम को खराब कर दिया। उन्होंने हर थाने में अपने गुर्गे पाल रखे थे।

एसीबी ने तो केवल दलाल की गिरफ्तारी की है जबकि दलाल से पहले डीआईजी की गिरफ्तारी होनी चाहिए। विधायक मलिंगा ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से भी डीआईजी की अविलंब गिरफ्तारी की मांग करने के साथ पूरे मामले की सघन जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बजरी के चक्कर में ही पुलिस की गोली से जिले के बसई डांग क्षेत्र में किशोर की मौत हो गई।

इस मामले में भी डीआईजी की संलिप्तता थी। इसलिए जिले में अवैध बजरी का बड़ा कारोबार चल रहा है। यह कारोबार करीब एक अरब रुपए प्रति वर्ष का है, जिसमें जिले के थानेदारों का पैसा इकट्ठा होकर डीआईजी तक पहुंचता था।

उन्होंने कहा कि डीआईजी गोड की गिरफ्तारी के साथ जिले में थानों में तैनात पुलिस अधिकारियों की भी पूरी जांच होनी चाहिए, कौन सा अधिकारी कितना रुपया प्रतिमाह डीआईजी को देता था। इससे जिले की पुलिस में खलबली मची हुई है।