चमकने वाला है पायलट का सितारा, बन सकते हैं मुख्यमंत्री

सभी नेता गहलोत के राजनीतिक कौशल का लोहा मानते है ऐसे में कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए उनका चयन लगभग तय माना जा रहा है

Dainikreporters

 

जयपुर
लोकसभा चुनावों की हार के बाद खिन्न राहुल गांधी अब राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद छोडने पर अड गए है। ऐसे में उनके स्थान पर नए चेहरे की तलाश शुरू हो गई है और इसमें सबसे उपर नाम मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का चल रहा है। गहलोत पहले भी राष्ट्रीयस्तर के कई पदों पर रह चुके है और मुख्यमंत्री बनने से पहले वे संगठन महासचिव भी रहे हैं। संगठन महासचिव रहते गहलोत ने कर्नाटक में बडा राजनीतिक दांव खेलते हुए कांग्रेस की सत्ता में वापसी करवाई थी। इसके बाद सभी नेता गहलोत के राजनीतिक कौशल का लोहा मानते है। ऐसे में कांग्रेस में राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए उनका चयन लगभग तय माना जा रहा है।
कांग्रेस ने अध्यक्ष पद के लिए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत के नाम पर हामी भर दी है.
इधर, गहलोत के केन्द्र में जाते ही मुख्यमंत्री पद के लिए सचिन पायलट के नाम की लाबिंग भी शुरू हो गई है। तय माना जा रहा है कि गहलोत के पद छोडते ही राज्य की कमान सचिन पायलट के हाथ में आएगी क्योंकि पांच साल संगठन की कमान संभालने के साथ ही प्रदेश में सरकार बनाने में कामयाब भी रहे। पायलट के अलावा कई दावेदार भी मैदान में आ सकते हैं लेकिन इसमें सबसे पहले नाम पायलट का ही माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो पायलट प्रदेश के सबसे युवा मुख्यमंत्री बनने वाले पहले व्यक्ति होंगे।
बता दें कि गत दिसंबर में मुख्यमंत्री के नाम पर जब दिल्ली में सियासी बैठकों का दौर चल रहा था उस समय भी पीसीसी चीफ सचिन पायलट को सीएम बनाए जाने की मांग को लेकर राजस्थान में गुर्जर समाज के लोगों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया था। मुख्यमंत्री पद को लेकर छिड़े घमासान में प्रदेश में कांग्रेस मुख्यमंत्री पद को लेकर दो खेमों में बंट गई थी. लगातार विरोध के स्वरों के बीच जोधपुर की सड़कों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग में सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की मांग की गई। इन पोस्टर पर लिखा था “राजस्थान की जनता करे पुकार, अबकी बार पायलट सरकार”, “नए युग की शुरुआत” यह पोस्टर जोधपुर के कांग्रेस के पूर्व पार्षद राजेश मेहता ने ही लगाए थे।
इधर, एक कयास यह भी है कि अगर गहलोत अपना पद छोड़ते हैं तो ऐसे में वह अगर सचिन पायलट का विरोध करेंगे तो किसी दूसरे नेता का भी नाम आगे कर सकते हैं। एक बात साफ है कि अगर पार्टी में गहलोत का नाम राष्ट्रीय अध्यक्ष के लिए तय किया तो इस पर निर्णय कम से कम अगले 1 महीने तक नहीं होगा क्योंकि प्रदेश में 27 जून से विधानसभा सत्र है और मजबूत विपक्ष के सामने पार्टी ऐसा कोई काम नहीं करेगी। जिससे कि विपक्ष हावी हो सके वैसे भी प्रदेश में कानून-व्यवस्था और अवैध बजरी बड़ी समस्या बनी हुई है।
 ऐसे में राजस्थान में पार्टी की पहली प्राथमिकता इन समस्याओं को दूर करने की होगी और अगर गहलोत को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया गया तो राजस्थान में दिक्कत आ सकती है।
ऐसे में 1 महीने का समय तो कम से कम रखा जाएगा और राष्ट्रीय अध्यक्ष को लेकर निर्णय नहीं होगा लेकिन राजनीति के जानकार मानते हैं कि अगर 1 महीने का समय गहलोत के जैसे राजनीति के जादूगर को मिला तो उनके लिए यह समय बहुत है।
Ko
 वहीं चर्चा इस बात को लेकर भी है कि पार्टी गहलोत को अगर अभी अध्यक्ष पद पर आसीन करती है तो ऐसे में अशोक गहलोत राजस्थान के मुख्यमंत्री भी रहेंगे और पार्टी के अध्यक्ष के तौर पर भी काम करेंगे क्योंकि पार्टी को भी पता है कि अशोक गहलोत का दिल राजस्थान में है ऐसे में वह अचानक उनसे मुख्यमंत्री पद ना लेकर कुछ समय तक उन्हें दोनों पद पर रखेगी।