ड्राईपोर्ट (सूखा बंदरगाह) के अभाव में पिछड़ रहा है बीकानेर

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Bikaner news । राजस्थान मेें बीकानेर एक संभाग मुख्यालय है और संभाग के चार जिले (बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ व चूरू) के व्यापारियों-उद्योगपतियों का न केवल प्रदेश बल्कि देश में एक नाम, सम्मान है। बावजूद इसके इन जिलों में व्यापार का विस्तार उम्मीदों के अनुरुप नहीं है जबकि देखा जाए तो संभाग से हर महीने लगभग 2 हजार कंटेनर का आयात-निर्यात होता है। 

राजस्थान के जयपुर, जोधपुर, उदयपुर व कोटा में रेलवे का ड्राइपोर्ट (सूखा बंदरगाह) है। इस कारण वहां पर बड़ी तेजी से व्यापार का विस्तार हो रहा है। रेलवे की वजह से उन इलाकों के व्यापारियों का सामान काफी तेजी से आता.जाता है। नजदीक में यातायात व्यवस्था होने के कारण लागत में कमी होती है, समय बचता है और वहां के लोग वैश्विक व देशव्यापी प्रतिस्पर्धा में पिछड़ नहीं पाते। लेकिन बीकानेर आज भी ड्राईपोर्ट (सूखा बंदरगाह) के अभाव में पिछड़ रहा है। रेलवे की आय के लिहाज से संभाग से होने वाला दो हजार कंटेनर का आयात-निर्यात लाभदायक है लेकिन बावजूद इसके बीकानेर को उसके हक के लिए लंबे समय से लड़ाई लडऩी पड़ रही है। 

बीकानेर व्यापार उद्योग मंडल के संरक्षक कन्हैयालाल बोथरा ने राज्य सरकार से मांग की है कि बिना किसी दबाव, राजनीति के बीकानेर में ड्राईपोर्ट जल्द से जल्द स्थापित कर देना चाहिए ताकि यहां के उद्यमियों-व्यापारियों की एक लम्बी मांग पूर्ण हो सके। 



नाल में स्वीकृत हुआ, चारदीवारी भी शुरु हुई लेकिन अचानक रोका काम


राजसीको ने आज से 13 साल पहले वर्ष-2007 में ड्राइपोर्ट नाल में स्वीकृत किया था और इसके लिए 4 करोड़ 46 लाख 22 हजार 999 रुपए स्वीकृत भी कर दिए थे। बाद में नाल में चारदीवारी का निर्माण भी शुरू हुआ। गोचर का मुद्दा आया तो मामला रुका। इसके बाद बात आगे बढ़ी नहीं और 2016 में इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। 


हजारों टन कच्चा माल है उपलब्ध

बीकानेर संभाग में क्ले, ऊन, मोठ, मूंगफली, मैथी, ग्वार गम एवं जीरा आदि ऐसा हजारों टन कच्चा माल उपलब्ध है। इनके प्रोसेसिंग की यूनिट्स बहुत कम लगी हुई है। यहां के कच्चे माल से गुजरात, महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बड़ी-बड़ी प्रोसेसिंग इकाइयां लग रही है, जिससे वहां आर्थिक विकास बढ़ रहा है। रोजगार के अवसर हमारे संभाग से कई गुना अधिक है।