गिनिज बुक अवार्डी शिव माली की कालका माता की पेंटिंग ढीकोला में प्रदर्शित होगी

Bhilwara news । भीलवाड़ा जिले के शाहपुरा तहसील क्षेत्र के ढीकोला निवासी गिनिज बुक अवार्डी शिव माली की प्रसिद्व पेंटिंग कालका माता को नवरात्र महोत्सव के दौरान ढीकोला के चामुंडा माता मंदिर में प्रदर्शित कर वहीं पर स्थापित की जायेगी। ढीकोला मूल के निवासी शिव माली वर्तमान में इन्दौर मध्यप्रदेश में अपनी कला को प्रदर्शित कर गिनिज बुक में अपना नाम दर्ज करा चुके है। शिव माली ने बताया कि यह पेंटिंग पिछले वर्ष की नवरात्री के समय बनाई गयी थी।

इसका प्रदर्शन इन्दौर में लक्ष्य गरबा महोत्सव के दौरान 9 दिन तक वहां पर किया गया था। वहां के पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री जितु पटवारी के संयोजन में इस गरबा महोत्सव का प्रतिवर्ष आयोजन होता है। वहां पर इस पेंटिंग का व्यापक स्तर पर प्रसार होने के कारण यह पेंटिंग देश भर में चर्चित हो गयी। शिव माली अब इस पेंटिंग को अपने पेतृक गांव ढीकोला के चामुंडा मंदिर में स्थायी रूप् से लगाने का फैसला किया है। शिव माली का कहना है कि देश में चर्चित हो चुकी यह पेंटिंग ढीकोला मंदिर में स्थापित करने के पीछे मकसद केवल इतना ही है कि यहां के चामुंडा माता मंदिर में यह पेंटिंग लगी रहेगी तो उसे सकून मिलेगा तथा यहां के देवी भक्त पूजा अर्चना कर सकेगें। इस पेंटिंग को आकर्षक फ्रेमिंग कराकर वह मंदिर को समर्पित करेगें। 

शिव माली बचपन से ही इन्दौर में अपने पिता भेरूलाल माली के साथ रह रहे है। बचपन से ही पेंटिंग का शौक होने के कारण वो इस कार्य में लगे है तथा इन्दौर के अच्छे फेस्टिवल में वो अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके है। विगत वर्ष पुरानी जींस पेंटों का उपयोग करके उसके द्वारा बनायी गयी आकर्षक पेंटिंग देश भर में चर्चित रही जिस पर उसका नाम गिनिज बुक में दर्ज किया गया था। शिव माली के पिता भेरूलाल माली इन्दौर में हलवाई का कार्य बरसों से कर रहे है, शिव माली के पेंटिंग कार्य को बढ़ाने में उनका पूरा सहयोग मिलता रहता है।

 ढीकोला में स्थापित होने वाली पेंटिंग के संबंध में शिव माली ने बताया कि महाकाली माता जी के गले में मुंडमाला एवम् क्रोधित विक्राल रूप पेंटिंग में बनाया गया। इंदौर के दर्शको को 9 दिनों तक गरबा महोत्सव में इस पेंटिंग को दर्शाया गया। इस पेंटिंग की चोड़ाई 5 फ़ीट व लम्बाई 8 फ़ीट है। अब ये पेंटिंग शिव माली ढीकोला गांव में बने माँ चामुंडा देवी के मंदिर में लगाने को बेताब है। इसके लिए मंदिर में तैयारी की जा रही है। पेंटिंग को बनाने में 5 दिन का समय लगा था। 

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