राजस्थान के भीलवाड़ा का एक ऐसा गांव जहां आज भी पशुपालक दूध बेचते नही फ्री बांटते

Bhilwara News। आज के आधुनिक भौतिक और अर्थ के युग में जहां पानी तक बिकता है ऐसे युग में अगर यह कहा जाए कि आज भी दूध फ्री में बांटा जाता है तो कुछ आश्चर्य और अचंभा होगा लेकिन यह सत्य है कि आज के इस अर्थ युग में भी राजस्थान के वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में एक ऐसा गांव है जहां पशु पालकों द्वारा दूध बेचा नहीं जाता बल्कि गांव में ही फ्री बांटा जाता है।

जिले के बनेड़ा उपखंड क्षेत्र के कंकोलिया ग्राम पंचायत में स्थित लसाडिया एक ऐसा गांव है, जहां आज भी पशुपालक दूध को बेचते नहीं बल्कि फ्री में बांट देते हैं ।

लगभग एक हजार की आबादी वाले लसाडिया गांव में लोग दूध का व्यापार नहीं करते, बल्कि घर में उत्पन्न होने वाले दूध का अपने परिवार में उपयोग करते हैं और जरूरत से अधिक उत्पन्न होने वाले दूध को गांव व आस पास के गाव मे जरूरतमंदों को फ्री में दे देते हैं । इस गांव में कोई भी व्यक्ति दूध बेचने का काम नहीं करता।

लसाडिया निवासी गंगाराम गुर्जर ने बताया कि यहां के लोग देवनारायण भगवान के इष्ट को मानते हैं और हमारा मानना है कि अगर कोई भी व्यक्ति दूध को बेचता है तो उसको बहुत नुकसान होता है उसकी गाय भैंस मर जाती है या उसके घर में कोई भी नुकसान हो जाता है इस कारण गांव में कोई दूध नहीं बेचता है ।यह एक प्राचीनकाल से पंरपरा है ।। गंगाराम गुर्जर ने कहा अब दूध न बेचना परंपरा बन गई है ऐसे मे अब तो यह धारणा है कि यदि दूध का कारोबार करेंगे तो नुकसान होगा.”
गांव के लोग बताते हैं कि उन्होंने अपने पूर्वजों से सुना है कि दूध में मिलावट करके बेचना भी पाप है ।

गांव का स्वरूप

एक हजार की आबादी वाले गांव में 80 प्रतिशत आबादी गुर्जर वर्ग की है, वहीं 60प्रतिशत लोग ग्वाले हैं, जिस वजह से यहां बड़ी संख्या में मवेशी पालन होता है. इसके अलावा यहां अन्य जाति वर्ग की आबादी 20 प्रतिशत है। गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती है, इसलिए दूध को न बेचने से उनके सामने किसी तरह की आर्थिक समस्या नहीं आती. गुर्जर परिवारों के अलावा लगभग हर घर में मवेशी हैं और सभी को जरूरत का दूध मिल जाता है, जिनके यहां ज्यादा उत्पादन होता है, वे दूसरों को दूध उपलब्ध करा देते हैं । “गांव का कोई भी परिवार दूध नहीं बेचता. यदि दही भी बनाई जाती है, तो उसे भी बांट दिया जाता है।

गाव वालो ने यह माना तथा इस बात से भी इनकार नहीं किया कि अब जिनके पास दूध बचता है वे उससे घी निकालकर जरूर बाजार में जाकर बेच देते हैं।
रामप्रसाद गुर्जर ने बताया कि मैंने बचपन से लेकर अभी तक किसी को दूध बेचते हुए नहीं देखा है गांव में लोग दूध ,दही ,छाछ फ्री में दे देते हैं केवल घी को ही लोग बाजार में बेचते हैं । समाजसेवी सुरेश शर्मा का कहना है की हमारी ग्राम पंचायत कंकोलिया के लसाडिया गांव में पशुपालक दूध मोल नहीं बेचेते हैं यहां के लोग दूध, दही ,छाछ फ्री में दे देते हैं यहां के लोग देवनारायण भगवान के इष्ट को मानते हैं यहां के लोगों का मानना है कि दूध बेचने से इनके पशु मर जाते हैं एवं घर में कोई बड़ा नुकसान हो जाता है इसलिए यहां के लोग दूध नहीं बेचेते हैं ।

Slider