राजस्थान के सरकारी स्कूलों मे विकसित होंगे न्यूट्रीशन गार्डन, उगाई जाएगी सब्जियां

Bhilwara News । राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों में एक और नहीं पहल करते हुए अब प्रदेश भर के सभी सरकारी स्कूलों में मिड डे मील में बच्चों को पोषक तत्व देने के उद्देश्य से अब सभी सरकारी स्कूलों में न्यूट्रीशन गार्डन अर्थ अर्थात सब्जियां स्कूल में ही उगाई जाएगी।

प्रदेश के सभी जिलों में सरकारी स्कूलों के। न्यूट्रीशन गार्डन इनमें पैदा होने वाली ताजी सब्जियों से बच्चों को मिड-डे-मील के तहत मिलने वाले भोजन में परोसा जाएगा ताकि इन बच्चों की सेहत सुधर सके मिड-डे-मील योजनांतर्गत विद्यालयों में इन्हें विकसित करने के लिए आदेश जारी किए हैं।
इससे पहले जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों में न्यूट्रीशन गार्डन विकसित करने के आदेश थे। परंतु अब विद्यालयों के लिए भी इन्हें लागू कर दिया गया है।

पोषण स्तर बढ़ाया जाएगा

बच्चों में पोषण स्तर को बढ़ाने के लिए यह निर्णय किया गया है। इसके तहत राजकीय विद्यालयों, मदरसों एवं विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में पढऩे वाले विद्यार्थियों को इनमें तैयार की जाने वाली पोषण वाली सब्जियां दी जाएंगी।

ये कमियां होंगी दूर होंगी और लाभ मिलेगा

-ताजी सब्जियों के उपयोग से पोषण तत्वों की कमी पूरी होगी
-विद्यार्थियों को प्रकृति और बागवानी का अनुभव मिलेगा
-इसकी स्थापना से वातावरण को सहायता मिलेगी
-विद्यालय में इनकी स्थापना से भूमि की उर्वरकता बढ़ेी
-विद्यार्थियों में परस्पर सहयोग की भावना विकसित होगी
-बाजार की तुलना में सस्ती व उत्तम गुणवत्ता वाली सबिजयां मिल सकेंगी
-विद्यालय में उगी सब्जियों में जहरीली दवाइयों एवं कीटनाशकों का प्रभाव नहीं होता है, जबकि बाजार में उगी सब्जियों में जहरीली दवा एवं कीटनाशकों का प्रभाव हो सकता है।

छात्रों व अभिभावकों का लिया जाएगा सहयोग

विद्यालयों में गार्डन विकसित करने के लिए अध्ययनरत विद्यार्थियों व उनके अभिभावकों का सहयोग लिया जा सकेगा। इनमें नियमित पानी देना, सार-संभाल, खाद देना जैसी जिम्मेदारी विद्यार्थियों को दी जाएगी। इसके अलावा स्वयं सेवी संस्था, इको क्लब, स्काउट, एनसीसी कैड्ेटस छात्र-छात्राओं, विद्यालय विकास समिति के सदस्यों के अलावा ग्रामीणों का सहयोग लिया जा सकता है।

न्यूट्रीशन गार्डन विकसित करने के लिए मिलेगा खर्चा

नयूट्रीशन गार्डन विकसित करने के लिए अधिकतम पांच हजार रुपए प्रति विद्यालय बीज, खाद एवं आवश्यक उपकरण खरीदे जा सकते हैं। जिन विद्यालयों के पास भूमि की कमी है वहां पर गमलों अथवा छतों पर इसे विकसित किया जाएगा। इनमें केवल जैविक खाद ही डालनी होगी।

रेकॉर्ड संधारित करना होगा, रोजाना की भेजनी होगी तस्वीरें

छात्रों के योगदान एवं अन्य गतिविधियों की नियमित रूप से तस्वीरें ली जा कर विभागीय इ-मेल पर भेजनी होंगी। साथ ही गार्डन से प्राप्त सब्जियों एवं फलों का मिड-डे-मील में उपयोग लिया जाए एवं इसका रिकॉर्ड संधारित करना होगा।