गणेश चतुर्थी, घर में ही करें इको फ्रेंडली गणेश जी की पूजा,कहां मिलेगी…

Bhilwara news । कोरोना वायरस संक्रमण महामारी के चलते इस साल सभी त्योहार और पर्व सिमट कर रह गए है । आगामी 22 अगस्त से शुरू होने वाले 14 दिवसीय गणेश महोत्सव को लेकर इस बार कोरोना के कारण मौहल्लो मे मूर्ति स्थापना व डांडिया रास जैसे आयोजन नही होंगे लेकिन गणेशोत्सव तो मनाया जा सीता है और वह भी घर-घर मे इसी को ध्यान मे।रखते हुए वस्त्र नगरी भीलवाड़ा के डॉ. कुसुम भट्ट द्वारा निर्दिष्ट इको फ्रेंडली गणेश की मूर्त को वैभव सांखला और आर्ट कलाकार सौरभ भट्ट की देखरेख मे भीलवाड़ा के उभरते आर्ट कलाकारो द्वारा तैयार की जा रही है ।


आलोक आर्ट गैलरी में कलाकारों द्वारा नदी की माटी को शुद्ध कर उनसे गणेश जी की मूरत तैयार की जा रही है। डॉ. कुसुम भट्ट द्वारा निर्दिष्ट इको फ्रेंडली गणेश की मूर्त को वैभव सांखला और सौरभ भट्ट की कड़ी मेहनत से समाज में रोजगार के अवसर प्रदान करना एक मात्र उद्देश्य है।


गैलरी के निदेशक गौवेर्धन लाल भट्ट ने बताया कि आगामी गणेश चतुर्थी का महोत्सव 22 अगस्त को कोरोना महामारी के चलते घर में ही मनाया जाना बेहतर है। इसके लिए भीलवाड़ा के वरिष्ठ स्कल्पटर आर्टिस्ट गौवेर्धन सिंह पंवार व कंटेम्पररी आर्टिस्ट सौरभ भट्ट और नलिनी शर्मा के निर्देशन में सोशल डिस्टेंसिंग की पालना करते हुए कलाकारों (कार्तिकेय, रिदम, हर्षवर्धन, रिद्धिमा, अमोल और अबीर) को पूर्ण रूप से इको फ्रेंडली गणेश जी की मूर्ति बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इन मूर्तियों की विशेषता

मूर्तियों की खास बात यह है कि इन्हें, कलाकारों ने स्वयं बनाया है। साथ ही इन पर किसी प्रकार का कोई रंग नहीं लगाया गया है, जिससे मूरत प्राकृतिक सौन्दर का अनुभव तो कराती ही है साथ ही कलाकारों की कलात्मक अभिव्यक्ति का भी एहसास कराती है। इसके साथ गणेश जी की बिदाई समारोह पर मूर्ति को घर में ही परिवार के सदस्सयों के साथ गमले में विसर्जित भी कर सकेंगे। और गमले में तुलसी का पौधारोपण भी कर सकेंगे। यह मूर्तियां सुभाष नगर सी-60सुलभ भट्ट आलोक स्कूल के पास उपलब्ध होगी

भट्ट का उद्देश्य

भट्ट का मानना है कि इस तरह के प्रयास से महिलाओं और युवाओं में रोजगार के अवसर प्रदान होंगे और “वोकल फ़ॉर लोकल” जैसे विचार से समाज में एक नई क्रांति का उदय होगा। लोकल कलाकारों द्वारा निर्मित मूर्तियों के कदरदान भीलवाड़ा से ही नहीं वरन अजमेर, जयपुर, मुम्बई जैसे महानगरों से भी इन मूर्तियों को सराहना मिल रही है, और इसके पीछे छिपी व्यापक सोच को सराहा जा रहा हैं। हर एक के जीवन में कुछ असाधारण शक्तियां होती हैं इसे पहचानना और आगे बढ़ाना ही जीने की कला है।