गुर्जरों की महापंचायत स्थगित, गुर्जर समाज ने दी 1 नवम्बर से राजस्थान जाम करने की चेतावनी

Bharatpur news /राजेंद्र शर्मा जती । राजस्थान के गुर्जर समाज ने आरक्षण को केन्द्र की 9वीं अनुसूची में शामिल करने तथा भर्तियों में पूरे 5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने सहित आधा दर्जन मांगों को लेकर 01 नवम्बर से आंदोलन का ऐलान कर दिया। गुर्जर नेता किरोड़ीसिंह बैंसला ने शनिवार को अड्डा गांव में बुलाई गई गुर्जर समाज की महापंचायत में गहलोत सरकार को अक्टूबर अंत तक का समय दिया है। साथ ही चेताया है कि उनकी मांगों को नहीं मानने की स्थिति में 01 नवंबर से राजस्थान जाम करेंगे।


गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति ने ढाई साल बाद अड्डा गांव में शनिवार को महापंचायत बुलाई थी। महापंचायत का समय सुबह 11 बजे तक का था, लेकिन कर्नल बैंसला शाम चार बजे सभा स्थल पर पहुंचे। वे एक घंटे मंच पर रहे और पांच बजे आंदोलन के अल्टीमेटम के साथ महापंचायत खत्म भी हो गई। महापंचायत दो धड़ों में बंटी दिखी। एक धड़ा यह चाहता था कि अभी आंदोलन का निर्णय टाल दिया जाए, क्योंकि कोरोनाकाल चल रहा है। साथ ही फसल बुआई का समय भी है। युवाओं का एक वर्ग आज से ही आंदोलन शुरू करना चाहता था। अंत में कर्नल बैंसला ने ऐलान किया कि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो एक नवंबर से आंदोलन किया जाएगा।


महापंचायत में 80 गांवों के लोगों को बुलाया गया था। दावा था कि इसमें करीब 20 हजार लोग शामिल होंगे, पर दावे के विपरीत करीब पांच हजार लोग ही जुटे। बीती रात सरकार ने जिला कलेक्टर नथमल डिडेल के जरिए संयोजक कर्नल बैंसला को वार्ता का प्रस्ताव भेजा था। प्रशासन ने बयाना, बैर, भुसावर, रूपवास समेत कई जगह शुक्रवार रात 12 बजे से इंटरनेट सेवा बंद कर दी थी। पूरे इलाके को छावनी में तब्दील कर 2350 जवान तैनात किए गए थे। सरकार ने देर रात कर्नल बैंसला से बातचीत के लिए आईएएस नीरज के पवन को विशेष दूत के तौर पर भेजा था। शुक्रवार देर रात नीरज भरतपुर के एसपी और कलेक्टर के साथ हिंडौन सिटी स्थित कर्नल बैंसला के आवास पर पहुंचे। पवन ने कर्नल बैंसला को सरकार की तरफ से वार्ता के लिए न्योता दिया। लेकिन, बैंसला नहीं माने।


गुर्जर समाज ने सरकार से जो मांगे की हैं, उनमें प्रमुख रूप से आरक्षण को केन्द्र की 9वीं अनुसूची में शामिल करने, बैकलॉग की भर्तियां निकालने व प्रक्रियाधीन भर्तियों में पूरे 5 प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने, एमबीसी कोटे से भर्ती हुए 1252 कर्मचारियों को नियमित करने, आंदोलन के शहीदों के परिजनों को नौकरी व मुआवजा देने, मुकदमों को वापस लेने तथा देवनारायण योजना लागू करने की मांग प्रमुख है।
गौरतलब है कि राज्य में 2006, 2007, 2008, 2010 और 2018 में गुर्जर आंदोलन हो चुके हैं। इसके लिए गुर्जर बाहुल्य इलाके बयाना के पीलूपुरा को आंदोलन का केंद्र बनाया जाता रहा है। 

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