विधानसभा में राजस्थान नगर पालिका संशोधन विधेयक ध्वनिमत से पारित

dainik reporters

Jaipur News । राज्य विधानसभा में बुधवार को राजस्थान नगर पालिका संशोधन विधेयक 2020 ध्वनिमत से पारित हुआ है। यह बिल उन नेताओं या व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जो नगर निगमों, पालिकाओं में चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे हैं। इस बिल के जरिए किए संशोधन के बाद अब चुनाव लडऩे वाले उम्मीदवार अगर झूठा या कहे गलत जानकारी का शपथ-पत्र निर्वाचन आयोग को देता है तो उस उम्मीदवार को जेल जाने के साथ-साथ जुर्माना भी देना पड़ सकता है। यानी शपथ-पत्र अगर गलत पाया गया तो वह दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।

संसदीय कार्यमंत्री शांति धारीवाल ने विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए बताया कि पार्षद चुनाव के नामांकन या शपथ-पत्र में गलत सूचना देने पर छह माह का कारावास, जुर्माना या दोनों से दण्डित किया जा सकेगा। पहले यह दण्डनीय अपराध नहीं माना जाता था, लेकिन अब इसे दण्डनीय अपराध की श्रेणी में शामिल किया गया है। धारीवाल ने बताया कि इस संशोधन के जरिए राज्य निर्वाचन आयोग की शक्तियों को और मजबूती प्रदान की है, जिसके तहत गलत निर्वाचन पर पार्षद प्रत्याशी के अलावा आम मतदाता भी याचिका दायर कर सकेंगे। यह याचिका नगरपालिका क्षेत्र के क्षेत्रीय अधिकारिता रखने वाले जिला न्यायाधीश के समक्ष निर्वाचन की तारीख से एक माह के अंदर प्रस्तुत की जा सकेगी।

इस संशोधन के जरिए शहरी क्षेत्रों में प्रतिबंधित एरिया या अन्य स्थानों पर ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउट स्पीकर, डीजे) तेज आवाज से बजाने या उपयोग पर भारी जुर्माना देना होगा। अभी ये जुर्माना राशि 2 हजार रुपए है, जिसे अब बढ़ाकर सरकार ने 5 हजार रुपए कर दिया।

एक लाख से कम आबादी वाले शहरों में जोनल प्लान नहीं

अधिनियम के संशोधन में यह भी प्रावधान किया है कि एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाए जाने वाले जोनल डवलपमेंट प्लान बनाना जरूरी नहीं होगा। अगर कोई निकाय बनाना चाहे तो बना सकती है, लेकिन इसकी बाध्यता नहीं होगी। वर्तमान में पालिका कानून के तहत सभी शहरों के जोनल डवलपमेंट प्लान बनाना जरूरी है।

सरकार के स्तर पर होगा प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित

अधिनियम में यह भी प्रावधान किया है कि राज्य सरकार किसी भी शहर में भवन निर्माण के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित कर सकेगी। प्रतिबंधित क्षेत्र मेंं किसी भी तरह का निर्माण करने पर जुर्माना देना होगा। निर्माणकर्ता के खिलाफ बीस हजार तक का जुर्माना लगेगा। ऐसे में भवन का निर्माण ध्वस्त करने के लिए राज्य सरकार स्वतंत्र होगी। इसके लिए एक नई धारा 194क को जोड़ा गया है।

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