शराब की दुकानों के आवेदनों से अब तक मिले मात्र 527 करोड़

Tonk News (रोशन शर्मा ) । नई आबकारी नीति से सरकार को तगड़ा झटका लगा है। अब तक दुकानों के नए सिरे से आवंटन करने पर सरकार को आवेदन मात्र से ही कई सौ करोड़ रुपए रुपए मिल जाते थे, जिसका रिफंड नहीं करना होता है। पर इस बार कई तरह के चार्ज बढ़ाए जाने के बाद लोगों के उत्साह में कमी आवेदन को लेकर काफी देखी जा रही है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग को आवेदन करने की तिथि बढ़ानी पड़ी है।

विभागीय सूत्रों के अनुसार शुक्रवार तक राज्य में अंग्रेजी शराब की दुकानों के लिए 56 हजार 500 आवेदन आए, जबकि देशी शराब की दुकानों के लिए एक लाख 15 हजार 100 आवेदन विभाग को मिले। इनमें अंग्रेजी शराब की दुकानों के आवेदन मात्र से ही सरकारी खजाने में 169 करोड़ रुपए से अधिक जमा हो गए,जबकि देशी शराब के लिए आवेदन से 354 करोड़ रुपए से ज्यादा मिले।

इस तरह दोनों तरह की दुकानों से सरकार को अब तक 527 करोड़ रुपए मिले हैं। अब इसकी तुलना बीते साल से की जाए तो सरकार को मोटा घाटा हुआ है। बीते साल दोनों तरह की दुकानों के लिए साढ़े चार लाख से ज्यादा आवेदन मिले थे,जिससे सरकारी खजाने में करीब 1200 करोड़ रुपए आ गए थे।

कम संख्या में आवेदन आने के बाद आबकारी विभाग हरकत में आ गया है। उसने आनन-फानन में आवेदन करने की अंतिम तिथि को बढ़ा दिया है। पहले आवेदन करने की अंतिम तिथि 27 फरवरी थी, जिसे बढ़ाकर अब 5 मार्च कर दिया गया है। साथ ही लॉटरी भी अब 12 मार्च को खोली जाएगी। विभाग को उम्मीद है कि इससे आवेदनों की संख्या बढ़ जाएगी।

राज्य की नई आबकारी नीति में अंग्रेजी और देशी शराब की दुकानों का नए सिरे आवंटन करने की घोषणा की गई थी। इसमें अंग्रेजी शराब की 1000 और देशी मदिरा की 6665 दुकानें साल 2020-21 में खोली जानी है। वैसे सरकार ने राजस्थान पर्यटन विकास निगम (आरटीडीसी), गंगानगर शुगर मिल्स और राजस्थान ब्रेवरेज कारपोरेशन को भी दुकानें खोलने की अनुमति दे दी है। ऐसे में शराब की दुकानों की संख्या को लेकर स्थिति साफ नहीं है।

आवेदन कम होने के कारण

– तीस फीसदी राजस्थान निर्मित नई देशी शराब की खरीद अनिवार्य करना
– ओवररेट या निर्धारित समय के बाद दुकान खोलने पर पहली बार में लाइसेंस निरस्त करना।
-लाइसेंस फीस 22 लाख से बढ़ाकर 26 लाख करना।
– मार्जिन में नाम मात्र की बढ़ोतरी।
– आरटीडीसी सहित कई सरकारी निगमों से शराब की दुकानें खोलने की अनुमति,जिससे प्रतिस्पर्धा बढऩा है।