हरियाणा पुलिस बनी मसीहा, दिल्ली के निराश परिजनों की जिंदगी में किया उजाला

फरीदाबाद । इंटरनेट की ताकत का इस्तेमाल करते हुए स्टेट क्राइम ब्रांच ने बोलने-सुनने में असमर्थ परिवार से बिछड़े बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लौटा दी। स्टेट क्राइम ब्रांच ने बच्चे का परिवार ढूंढ निकाला और उसे परिवार से मिलवा दिया। स्टेट क्राइम ब्रांच में तैनात एएसआइ अमर सिंह ने बताया कि 18 सितंबर को करीब 14 वर्षीय एक बच्चा मांगर पुलिस चौकी के एरिया में लावारिस हालत में घूमता हुआ मिला था। मांगर पुलिस ने बच्चे को भारत कालोनी स्थित शेल्टर होम में में छोड़ दिया। वहां से उस बच्चे के बारे में स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम को सूचना मिली।

एएसआइ अमर सिंह, महिला एसआइ शीतल और सिपाही मोहनलाल आश्रम में गए । बच्चे से बात करनी चाही तो पता लगा बच्चा ना तो बोल सकता है और ना ही सुन सकता है। कई दिनों बाद नजफगढ़ दिल्ली से एक परिवार ने दावा किया कि बच्चा उनका है। वह कई दिन से लापता है। परिवार वाले उसे ढूंढ-ढूंढकर थक चुके थे और उन्होंने उम्मीद छोड़ दी थी। एएसआइ अमर सिंह ने उन्होंने परिवार से बच्चे की फोटो व अन्य कागजात मांगे। मिलान होने पर बाल कल्याण समिति के माध्यम से बच्चे को परिवार को सौंप दिया गया।

स्टेट क्राइम ब्रांच ने मानसिक रूप से कमजोर 22 वर्षीय युवक का परिवार केवल एक नाम के सहारे ढूंढ लिया। युवक लंबे समय से घर से लापता था। वह लावारिस घूमते हुए मेवात पुलिस को मिला था। उसे नल्हड़ मेवात स्थित मेडिकल कालेज में भर्ती करा दिया गया। अस्पताल में तैनात प्रेम भारद्वाज ने युवक के परिवार को ढूंढने की ठानी। उन्होंने इसकी सूचना स्टेट क्राइम ब्रांच को दी। एएसआइ को उन्होंने बताया कि युवक केवल अपने गांव का नाम किलापुर ले रहा है। उसे जिला या प्रदेश का नाम भी नहीं मालूम। केवल गांव के नाम के सहारे उसका पता ढूंढना टेढ़ी खीर था। 

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