फ्रेंड्स -डे पर विशेष आलेख

संकेतिक

वैसे तो दोस्ती के लिए कोई दिन नही होता है लेकिन आज दोस्ती के दिन पर मेरा यह आलेख वास्तविकता और सत्य घटना (वृतांत) है । इस आलेख के माध्यम से मेरा उद्देश्य किसी की भावनाओ को आहत पहुंचाना नही है बल्कि एक संदेश देना मात्र है ।

दोस्ती यह प्यार शब्द का प्रतीक और ढाई अक्षर का शब्द है लेकिन इस ढाई अक्षर के शब्द मे बहुत गुढ रहस्य या बात है । दोस्त वह होता है जो जीवन भर आखरी सांस तक साथ होता है ।।इस जीवन मे रिश्तेदार, घर वाले, आस पडौसी, सहयोगी, अच्छे समय मे चापलूस बन मंडराने वाले यह सब साथ छोड देते है लेकिन एक सच्चा दोस्त कभी भी साथ नही छोडता । आधी रात को भी बोलो तो दौडता हुआ आ खडा होता है बशर्ते आप भी उस दोस्त के प्रति समर्पित रहे हो (ताली दोनो हाथ सै बजती है,) । दुनिया, समाज, घर वाले, बाहरे वाले इन सबसे ऊपर होता है दोस्त । न सर्दी, न गर्मी, न बरसात न धूप न छांव कुछ नही देखता बस दोस्त ही सर्वोपरि हो वह है सच्चा दोस्त ।।

आजकल दोस्ती का मतलब केवल -केवल गरज है और जो चापलूसी करे , ऊंचे-ऊंचे केवल सपने दिखाए जिनका धरातल से कोई वास्ता न हो , अपना काम निकाले वह है दोस्त । आज के इस दौर मे कुछ सच्चे दोस्तो को अपवाद स्वरूप छोडकर सब दोस्ती के नाम पर दिखावा है । अपनी चंद इच्छाओ, झूठी वाही – वाही , अपनी दिखावे के लिए,अपनी प्रशंसा के लिए मैने ऐसे दोस्त को दशक की दोस्ती को ठुकराते हुए करीब से देखा है ।

मै अंत मे यही कहना चाहूंगा की दोस्तों की फौज नही बस एक ही दोस्त बनाओ लेकिन ऐसा की वह अंतिम सांस तक साथ दे और उस दोस्ती के साथ छलावा, फरेब , झूठ, गद्दारी न करे ।

चेतन ठठेरा वरिष्ठ पत्रकार

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