ट्रेन में मिले 1.40 करोड़ रुपये बने पहली किसके, जीआरपी पुलिस की भूमिका संदेह के दायरे मे

कानपुर/ सेट्रल स्टेशन में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस में मिला 1.40 करोड़ रुपया किसी पहेली से कम नहीं है। जीआरपी और आयकर विभाग जब्त रुपयों की जांच कर ही रही है कि अब गाजियाबाद की एक कंपनी ने अपना रुपया होने का दावा ठोक दिया। ऐसे में अब सवाल उठता है कि जीआरपी ने आखिरकार जब्त रुपयों को केस प्रापर्टी क्यों नहीं बनाया। अगर केस प्रापर्टी बनाया गया होता तो शायद कोई मालिकाना हक सामने न आता। केस प्रापर्टी न होने से आयकर विभाग को संतुष्ट करने की ही कंपनी को जरूरत है और कंपनी को रुपया मिल सकता है। इससे यह भी कयास लगाया जा रहा है कि कहीं जीआरपी का गठजोड़ तो नहीं है। हालांकि मामले की जांच हो रही है और जल्द ही खुलासा होने की संभावना है।

दिल्ली से चलकर बिहार के मधुबनी जा रही स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस 15 फरवरी की रात्रि कानपुर के सेंट्रल स्टेशन में रुकी थी। इस दौरान पेंट्रीकार के कर्मचारियों ने एक लावरिस लाल रंग के बड़े सूटकूस की जानकारी जीआरपी और आरपीएफ को दी थी। अधिकारियों के साथ पुलिस बल ने पेंट्रीकार से सूटकेस को कब्जे में लिया और एक दिन बाद जब उसे खोला गया तो उसमें 1.40 करोड़ रुपये मिले थे। इतनी बड़ी रकम का कोई वारिस सामने न आने पर जीआरपी ने मालखाने में सूटकेस को रखकर आयकर विभाग को मामले की जानकारी दे दी।

जीआरपी और आयकर विभाग की टीमें बराबर जांच कर रही थीं, पर मालिकाना हक का कोई भी दावेदार नहीं मिल सका। इसको लेकर कानपुर से लेकर दिल्ली तक बराबर चर्चा का बिन्दु बना हुआ है, लेकिन अब गाजियाबाद की एक कंपनी ने इन रुपयों पर अपना दावा कर दिया है।

कंपनी के दावे पर जीआरपी और आयकर की टीमें सवाल-जवाब के लिए तैयारी भी कर रही हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसी कंपनी की इतनी बड़ी रकम गायब हो जाती है और कानपुर में पकड़े जाने के बाद भी करीब 13 दिनों तक शांत रहती है। कंपनी की चुप्पी और जीआरपी द्वारा केस प्रापर्टी न बनाये जाने पर यह कयास लगाया जा रहा है कि कहीं पूरा मामला गठजोड़ का तो नहीं है।

बी4एस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने किया दावा

जीआरपी और आयकर की टीमें लावारिस रुपयों की जांच कर रही हैं और जांच में अब तक जो सामने आया है उसके अनुसार एक अज्ञात व्यक्ति अपने को टीटीई बताते हुए दिल्ली स्टेशन में सूटकेस को पेंट्रीकार में रखवाया ​था। यह भी बताया गया था कि कानपुर में रेलवे के अधिकारी सूटकेस को रिसीव कर लेंगे, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दोनों विभाग की टीमें इस जद्दोजहद में रहीं कि आखिर ये रुपया किसका है और कौन इसे रखेगा। इस बीच गाजियाबाद की टेलीकॉम सेक्टर में सर्विस देने वाली कंपनी बी4एस सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड ने 28 फरवरी को राजकीय पुलिस बल (जीआरपी) कानपुर सेंट्रल स्टेशन के अधिकारियों को पत्र भेजकर यह राशि अपनी होने का दावा किया।

कंपनी का कहना है कि उसने इस धन को लखनऊ में अपने ऑफिस के कर्मचारियों का वेतन बांटने के लिए भेजा था। जीआरपी ने इस पत्र की जानकारी आयकर विभाग को भी दी। आयकर विभाग दावा करने वाली कंपनी के बारे में जानकारी हासिल कर रही है और पता चला कि टेलीकॉम सेक्टर में सर्विस देने वाली कंपनी का लखनऊ में तो आफिस है ही, इसके अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई ब्रांच आफिस हैं।

कर चोरी की जांच करता है आयकर विभाग

आयकर के जानकार अधिवक्ता अभिषेक मांगलिक ने शुक्रवार को बताया कि अगर जीआरपी मुकदमा दर्ज करती तो शायद कोई भी दावेदार नहीं मिलता। इसके पीछे का कारण बताते हुए कहा कि मुकदमा दर्ज होने पर यह रुपया केस प्रापर्टी हो जाता और आपराधिक मुकदमा चलने के बाद ही कोर्ट से रुपया रिलीज होता। ऐसे मामलों में कोर्ट में कानूनी प्रक्रिया लंबी भी चलती है। वहीं आयकर विभाग ऐसे मामलों में सिर्फ यह जांच करता है कि कहीं रुपया आयकर चोरी का तो नहीं है और आय का स्रोत क्या है। अधिवक्ता के मुताबिक अगर कंपनी आयकर विभाग को संतुष्टजनक जवाब दे देती है तो आसानी से रुपया रिलीज हो जाएगा।

अधिकारियों का कहना

जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक राममोहन राय ने बताया कि कंपनी का पत्र विभाग को 28 फरवरी को मिल गया था। इसकी जानकारी आयकर विभाग को दे दी गई है। आगे की कार्रवाई आयकर विभाग ही करेगा। प्रयागराज मंडल के प्रभारी एसपी बृजेश कुमार सिंह ने बताया कि इस मामले में हमारी जांच चल रही है। कंपनी से भी दस्तावेज मांगे गए हैं। आयकर विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

शुरु से सवालों के घेरे पर रही कार्यवाही

बताते चलें कि जिस रात्रि को पेंट्रीकार में लाल रंग का सूटकेस पकड़ा गया उसी रात्रि से अब तक की हो रही कार्यवाही सवालों के घेरे में है। सबसे पहले तो आरपीएफ में में सूटकेस को रखा गया और जानकारी रेलवे अधिकारियों को दी गयी। अधिकारियों ने जीआरपीएफ और आरपीएफ की मौजूदगी में सूटकेस को खुलवाया और रुपयों की गिनती हुई।

जबकि जानकारों के मुताबिक लावारिस सूटकेस मिलने पर सबसे पहले बम निरोधक दस्ते को जानकारी देना चाहिये और रुपयों की गिनती के दौरान वीडियो बनाना चाहिये। यही नहीं अब तक जीआरपी और आयकर विभाग की टीमें कोई भी ठोस सबूत एकत्र नहीं कर सकी। ऐसे में यह माना जा रहा है कि दावा करने वाली कंपनी कानूनी पहलुओं से अच्छी तरह से वाकिफ है और जिस प्रकार से अब तक पूरे मामले को लेकर कार्रवाई हुई है उससे कंपनी को ही लाभ मिलेगा। हालांकि सवालों का जवाब देना कंपनी के लिए चुनौती भरा होगा।