प्रधानमंत्री के मंत्र का असर, जैविक कॉरिडोर में सब्जी उत्पादन से समृद्ध हो रहे किसान

लगभग 40 साल पहले 1960 के दशक में बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए अधिक अन्न उपजाने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार ने विदेशों से रासायनिक खाद का आयात शुरू किया था। किसानों को भी इसके प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया था। अब वही रासायनिक खाद जानलेवा साबित हो रहा है। इसे ध्यान …

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August 5, 2021 1:28 pm

लगभग 40 साल पहले 1960 के दशक में बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए अधिक अन्न उपजाने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार ने विदेशों से रासायनिक खाद का आयात शुरू किया था।

किसानों को भी इसके प्रयोग के लिए प्रेरित किया गया था। अब वही रासायनिक खाद जानलेवा साबित हो रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने- नो केमिकल, यानी जैविक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया है।

बिहार में बेगूसराय समेत गंगा किनारे के 13 जिलों को जैविक कॉरिडोर में शामिल किया गया है, जिसका असर सुदूर गांवों तक पहुंच गया है। यहां बड़े पैमाने पर किसानों ने जहर मुक्त भोजन के लिए जैविक तरीके से सब्जी और फसल उत्पादन करना शुरू किया है। तीन सौ एकड़ से भी अधिक जमीन में इस वर्ष विभिन्न प्रकार की सब्जियां लगाई गई हैं।

जैविक तरीके से उपजाया जा रहा करेला, झींगा, बैगन, टमाटर, कद्दू, खीरा एवं केला आदि लोगों के थाली तक पहुंच रहा है। इससे किसानों का पहले के मुकाबले आधे से भी कम खर्च हो रहा है। इसके मुकाबले उन्हें बेहतरीन आय हो रही है। एक तरफ किसानों की आर्थिक प्रगति का द्वार खुल गया है, तो दूसरी ओर लोगों के घर में शुद्ध खाना बन रहा है।

अब यह जैविक सब्जी सरकारी सहयोग से देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचाने की प्रक्रिया भी बिहार सरकार शुरू कर रही है। जैविक खेती कर रहे किसान मुरारी मिश्रा, कृष्णदेव राय, शंकर महतो, राजेश सिंह, शिवशंकर सिंह आदि ने बताया कि 60 साल पहले खेत में रासायनिक खाद-दवा का प्रयोग नहीं होता था। जनसंख्या में अत्यधिक वृद्धि हुई तो बढ़ती हुई जनसंख्या का पेट भरने के लिए सरकार उर्वरक के प्रयोग को बढ़ावा देने लगी।

पैदावार बढ़ा तो हरित क्रांति की शुरुआत हुई, पौधों को तुरंत भोजन मिलने से वृद्धि और उपज तेज हो गई। विदेश से मंगाए गए खाद हजारों वर्षों से जमीन में दबे उर्वरा शक्ति को तुरंत पौधे को पहुंचाने लगे। इससे फसल अच्छी हुई, लेकिन 15-20 साल बाद ही जमीन की उर्वरा शक्ति कम होने लगी।

रासायनिक खाद के प्रयोग से अधिक उपज होने के कारण लोगों के पेट तो भरने लगे, लेकिन रासायनिक खाद का असर उत्पाद के माध्यम से शरीर में जाने से विभिन्न प्रकार की बीमारी बढ़ गई। लोग गैस्ट्रिक, डायबिटीज और कैंसर की चपेट में आ गए।

रोगों की बढ़ती संख्या के बाद रिसर्च में पता चला कि अधिकतर बीमारियों का कारण रासायनिक खादयुक्त भोजन है। इसके बाद अब सरकार लोगों को जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रही है।

इन किसानों का कहना है कि हम लोगों ने बड़े पैमाने पर सब्जी की खेती की है, उससे हमारी आर्थिक समृद्धि के द्वार खुल गए हैं। हमने जैविक खेती का अभियान अन्य किसानों तक पहुंचाना शुरू कर दिया है।

जैविक खेती से जमीन में नाइट्रोजन फिक्स होती है, वायुमंडल से जब जमीन में नाइट्रोजन फिक्स होगी तो जमीन की उर्वरा शक्ति पुनः कायम होगी और बगैर खाद के भी फसल हो सकेगी।

सभी लोगों को प्रधानमंत्री के इस अभियान को आत्मसात करना चाहिए।पहले से जैविक खेती कर रहे किसान सलाह देते हैं कि सभी किसान अपने जमीन की मिट्टी का टेस्ट कराएं, उसमें उर्वरक की मात्रा और जमीन के शुद्ध होने के समय का पता लगाएं।

जैविक तरीके से खेती करें-क्योंकि अगला भविष्य जैविक खेती का है। सरकार चाहती है कि 60-70 वर्ष पहले की तरह खेती हो, धीरे-धीरे लोग रासायनिक खाद से दूर हों, प्रोडक्शन कम हो लेकिन शुद्ध हो तो रेट ऊंचा मिलेगा।

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