गर्मियों में जल संकट के निदान को महिलाओं ने बना दिया बोरी बांध

झांसी। ललितपुर के तालबेहट तहसील के गांव विजयपुरा में 100 से अधिक महिलाओं ने बरुआ नदी की जलधारा को रोकने के लिए 8 दिन तक श्रमदान करके पांच हजार बोरी से एक बड़े बांध का निर्माण कर दिया है। इन दिनों बरुआ नदी के किनारे बसे गांवों में पानी की कमी रहती है उसकी पूर्ति के लिए अपने आप में यह चौकाने वाला कार्य किया है। जल सहेलियों ने इस साल हो रहे जल संकट को देखते हुए गांव में संगठन तैयार किया और मिलकर एक बड़े बोरी बांध का निर्माण करके न्यूनतम जलस्तर वाली नदी में पानी के बड़े भंडार को सुरक्षित किया है।

गौरतलब है कि, इन दिनों बुंदेलखंड में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है। कुंए, हैंडपंप और तालाब में पानी का स्तर कमजोर होता जा रहा है। कुंए सूखने के कारण गेहूं की फसल में आखरी पानी नहीं लग पाया है। जिसके कारण गेहूं सूख रहा है किसान चिंतित है। इस इलाके में भी गेहूं की फसल खराब हो गई थी। ग्रामीणों ने जब यह बात जल सहेली और पानी पंचायत संगठन को बताई तो उन्होंने तय किया कि हम नदी में कितना पानी रोकेंगे। भले ही हमारी रवि की फसल खराब हो गई हो लेकिन आने वाले दिनों में इस पानी से वह जायद की फसल लेंगे ताकि उन्हें गांव से पलायन न करना पड़े और अपने गांव में ही रोजगार के अवसर पैदा हो सके।

इस काम को आगे बढ़ाने का काम परमार्थ संस्था ने किया। संस्था के कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों के इस संकल्प को आगे बढ़ाने में उनके उत्साह को बढ़ाया। गांव की महिलाओं ने पांच हजार से अधिक सीमेंट की खाली बोरियों में बालू और मिट्टी भरकर एक बड़े बांध का निर्माण किया है। आज इस बांध के निर्माण होने से नदी के पीछे के हिस्से में एक किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में पानी का भंडारण हो गया है। जो आसपास के गांवों में हो रहे जल सकंट से निजात दिलाने के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

इनका है कहना

 

गांव के मुन्ना सहरिया कहते हैं कि उन्होंने यह काम अपनी जरूरत और नदी के पुनर्जीवन के लिए किया है लेकिन यह काम इस गांव की जल सहेलियों के सहयोग से ही संपन्न हो पाया है। इस काम को देखने के लिए आस पास के गांवों के लोग आ रहे हैं।

महिला दिवस पर हो ऐसी जल सहेलियों की जीवटता का सम्मान

जल जन जोड़ो अभियान के राष्ट्रीय संयोजक संजय सिंह ने बताया कि बुंदेलखंड में इसी तरह के प्रयासों की निरंतर आवश्यकता है। ऐसे जल भागीरथीयों के सम्मान के लिए सरकार और समाज को आगे आना चाहिए। 8 मार्च को जब पूरी दुनिया में महिला दिवस मनाया जा रहा है ऐसे अवसर पर कुसुम, शारदा वंशकार, कविता, गुड्डी इन जल सहेलियों के कार्य का जरूर सम्मान करना चाहिए।