DOLO-650 दवाई की बिक्री के लिए कंपनी ने डाॅक्टरों को बांटे 1000 करोड़ के गिफ्ट, सुप्रीम कोर्ट ने लिया एक्शन, क्या

उदाहरण के तौर पर इस तरह दवा कंपनियों द्वारा फंड अपनाने पर चिकित्सकों को महंगे महंगे दिए जाने वाले उपायों की कीमत दवाइयों के माध्यम से ही रोगियों से वसूली जाती है उदाहरण के तौर पर DOLO-650 की 15 गोलियो की स्ट्रीप( पत्ता) बाजार मे मेडिकलषपर 27 से 30 रूपये मे बिक रहा है

August 19, 2022 6:49 pm
DOLO-650 दवाई की बिक्री के लिए कंपनी ने डाॅक्टरों को बांटे 1000 करोड़ के गिफ्ट, सुप्रीम कोर्ट ने लिया एक्शन, क्या

नई दिल्ली / देश मे दवाईयों की बिक्री के लिए दवा निर्माता कंपनियों द्वारा डाॅक्टरो को करोडों रूपये के उपहार बांट देती है और उसका भार रोगियों पर पडता है अर्थात कीमत रोगियों से वसूली जाती है । कोरोनाकाल मे सर्दी जुखाम बुखार के लिए काम अने वाली एक साधारण गोली की बिक्री बढ़ाने के लिए उक्त गोली निर्माता कंपनी ने देशभर में चिकित्सकों को 1000 करोड़ रुपए से अधिक की गुहार बांट दिए इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में एक बार याचिका को कोर्ट ने गंभीर मानते हुए सरकार से 10 दिन में जवाब तलब किया है और अब इस मामले की सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

फेडरेशन ऑफ मेडिकल ऐंड सेल्स रिप्रजंटेटिक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया की ओर से सुप्रीम कोर्ट में फेडरेशन के अधिवक्ता संजय पारीक के जरिए एक याचिका(PIL) दायर की गई जिसमें अधिवक्ता संजय पारीक ने उल्लेख किया कि पेरासिटामोल दवाई डोलो 650 (DOLO -650 Mg ) जो सामान्यतया सर्दी जुखाम और बुखार में दी जाती है इस दवा निर्माता कंपनी ने अपनी इस दवा की बिक्री को बढ़ाने के लिए डॉक्टरों को 1000 करोड़ रुपए के अधिक राशि के मुफ्त उपहार बांटे गए। याचिका में कहा गया है कि अगर इस तरह का काम किया जाता है तो न केवल दवा के ओवरडोज से रोगी बढ़ेंगे बल्कि इससे मरीजों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ सकता है इस तरह के घोटालों से बाजार में दवाओं की कीमत और बिना मतलब की दवाओं की भी समस्या पैदा होती है याचिका में यह भी दावा किया गया कि कोरोना महामारी के समय ऐसी दवाइयों का अधिक प्रमोशन किया गया और अनैतिक ढंग से बाजार में सप्लाई की गई।

विदित है कि उदाहरण के तौर पर इस तरह दवा कंपनियों द्वारा फंड अपनाने पर चिकित्सकों को महंगे महंगे दिए जाने वाले उपायों की कीमत दवाइयों के माध्यम से ही रोगियों से वसूली जाती है उदाहरण के तौर पर DOLO-650 की 15 गोलियो की स्ट्रीप( पत्ता) बाजार मे मेडिकलषपर 27 से 30 रूपये मे बिक रहा है लेकिन इसकी कंपनी को इसके निर्माण मैं बहुत ही न्यूनतम दर आई है और यह दवा रोगी के हाथों में पहुंचते-पहुंचते सारा कमीशन जुड़कर ₹27 से ₹30 पहुंच गई है इसी तरह का हाल अन्य दवाइयों का भी है जिनकी कीमत असल में एक से ₹2 होती है और वह बाजार में 50 से ₹75 तक में बिकती है।

इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश चंद्रचूड़ और न्यायाधीश ए एस बोपन्ना की बेंच ने सुनवाई करते हुए मामले को बेहद गंभीर माना । याचिका में 1000 करोड रुपए के उपवास मुफ्त में बांटे जाने का दावा सुनकर न्यायाधीश भी हैरान रह गए न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा कि यह सुनकर बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा है उन्होंने अदालत के अंदर ही कहा कि जब मुझे कोरोना का तो मुझसे भी यही दवा लेने को चिकित्सकों ने कहा था यह मामला तो बहुत गंभीर है इस पर माननीय दोनों न्यायाधीशों ने मामले को अति गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से 10 दिन में जवाब तलब यह है और अब इसकी सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

दवा कंपनी पर कुछ समय पहले ही सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBST) ने कंपनी के 36 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की थी और करीब 300 करोड़ से अधिक की टैक्स चोरी की पकड़ी गई थी इस छापेमारी के बाद सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज ने दावा किया था कि दवा निर्माता कई तरह की आर्थिक गतिविधियां करता है।

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