बिहारवासियों को कोरोना के मुफ्त टीके लगाकर भाजपा देखने लगी सत्ता में वापसी की आस

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार वादे हैं वादों का क्या? जब निभाने का समय आएगा तब देखा जाएगा । ‘चुनाव जीतने के लिए जितने भी लोकलुभावन घोषणाएं, शपथ पत्र और वचन पत्र दे सकते हैं, दे दीजिए । चुनाव हो जाने या सत्ता में आने के बाद पब्लिक कहां याद रखती है । मान लीजिए …

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October 22, 2020 5:30 pm

शंभू नाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार

वादे हैं वादों का क्या? जब निभाने का समय आएगा तब देखा जाएगा । ‘चुनाव जीतने के लिए जितने भी लोकलुभावन घोषणाएं, शपथ पत्र और वचन पत्र दे सकते हैं, दे दीजिए । चुनाव हो जाने या सत्ता में आने के बाद पब्लिक कहां याद रखती है । मान लीजिए कुछ लोगों को राजनीति पार्टियों की चुनावी घोषणाएं अगर याद भी रहे तो सरकारें उसे कोई न कोई बहाना बनाकर टालती रहती है’ । चलिए अब बात को आगे बढ़ाते हैं । ‘गुरुवार को सियासी बाजार में भाजपा के कोरोना टीके में खूब उछाल देखा गया’ । लेकिन जब विपक्षी दलों के नेताओं को मालूम हुआ कि यह तो चुनावी फंडा है तो भाजपा के इस लोकलुभावन घोषणा पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए । आइए आपको बताते हैं पूरा माजरा क्या है ।

बिहार चुनाव के लिए आज भाजपा ने अपने घोषणा पत्र जारी किया ।केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीजेपी का चुनावी घोषणा पत्र (मेनिफेस्टो) जारी किया। घोषणा पत्र में पांच सूत्र, एक लक्ष्य और एक संकल्प को स्थान देते हुए आत्मनिर्भर बिहार बनाने का संकल्प दोहराया । घोषणा पत्र में कोरोना वैक्सीन का मुफ्त टीकाकरण का वादा भी किया गया है। ‘बिहार के लिए बीजेपी ने अपने विजन डाक्यूमेंट में 11 संकल्प किए हैं, इनमें सबसे पहला है कि अगर सत्ता में आए तो कोरोना वैक्सीन का मुफ्त टीकाकरण किया जाएगा’। यही नहीं भाजपा ने बिहार में 19 लाख लोगों को रोजगार देने की भी बात कही है । इससे पहले राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव ने प्रदेश में सरकार आने पर 10 लाख लोगों को रोजगार देने की बात कही थी । उसी के बदले रोजगार देने के मामले में भाजपा एक कदम आगे बढ़ गई ।

विपक्ष और सोशल मीडिया पर भाजपा के इस कदम पर उठे सवाल—

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए आज बीजेपी ने अपना घोषणा पत्र जारी किया है। इसमें पार्टी ने बिहार की जनता को फ्री में कोरोना वैक्सीन देने का वादा किया है। इसे लेकर अब राजनीति शुरू हो गई है। ‘आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि कोरोना का टीका पूरे देश का है, भाजपा का नहीं। तेजस्वी ने कहा कि बीजेपी के पास चेहरा नहीं है। उन्होंने कहा कि वित्तमंत्री द्वारा विजन डॉक्यूमेंट जारी कराया जा रहा है यानी इनके पास कोई चेहरा नहीं है’। तेजस्वी ने कहा कि वित्त मंत्री से पूछिए कि बिहार को सवा लाख करोड़ का पैकेज कब और कैसे मिला। वहीं ‘जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि क्या केंद्र सरकार भाजपा के खजाने से इन टीकों का भुगतान करेगी? यदि यह सरकारी खजाने से आ रहा है तो बिहार को मुफ्त टीके कैसे मिल सकते हैं, जबकि देश के बाकी हिस्सों में भुगतान करना पड़ेगा’ ? यह लोकलुभावन वादा गलत है।

दूसरी ओर बॉलीवुड डायरेक्टर ओनिर ने बीजेपी के इस चुनावी वादे पर ट्वीट करते हुए कहा कि ‘दुखद है कि वोट के बदले फ्री वैक्सीन दिए जाने की बात हो रही है। ओनिर ने कहा कि इसका मतलब यह हुआ कि शेष भारत को तब तक इंतजार करना होगा, जब तक वह बीजेपी को वोट नहीं देते। बिहार चुनाव में भाजपा के घोषणापत्र के बाद सोशल मीडिया पर भी तमाम प्रकार की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं ।

अन्य राज्यों में भी कोरोना वैक्सीन मुफ्त लगाने की मांग उठेगी—

‘कोरोना वैक्सीन चुनावी वादों का हिस्सा बन चुकी है’। बिहार बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में पहला ‘संकल्‍प’ वैक्‍सीन को लेकर ही रखा है। आज भाजपा ने अपने घोषणा पत्र में वादा किया है कि टीका तैयार होने पर हर बिहारवासी को मुफ्त में लगेगा। दूसरी ओर बीजेपी ने बिहार में मुफ्त वैक्‍सीन का वादा करके लगभग साफ कर दिया है कि सरकार नागरिकों को मुफ्त में टीका उपलब्‍ध कराएगी। अगर ऐसा नहीं भी होता तो राज्‍य सरकारें अपने खर्च पर नागरिकों को वैक्‍सीन लगवा सकती हैं। ‘अगर बिहार में मुफ्त वैक्‍सीन मिलेगी तो बाकी राज्‍यों में भी फ्री में टीका लगाने की डिमांड बढ़ेगी’ ।

ऐसे में अगर केंद्र सरकार कोई कीमत तय भी करती है तो राज्‍य सरकारें उसे चुकाएंगी ताकि लोगों की नाराजगी से बचा जा सके। अगर एक राज्‍य में फ्री वैक्‍सीन मिलेगी और दूसरे राज्यों में पैसा लिया जाएगा तो लोग अदालत का रुख भी कर सकते हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि केंद्र ही इस महामारी के टीके का पूरा खर्च उठाएगी। बता दें कि बिहार में पहले चरण में 71 सीटों के लिए 28 अक्टूबर को, दूसरे चरण में 94 सीटों के लिए तीन नवंबर को और तीसरे चरण में 78 सीटों पर सात नवंबर को मतदान होगा और दस नवंबर को नतीजे आएंगे।

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