24 साल से हार का तिलिस्म नहीं तोड़ पा रहे शिक्षक नेता

मेरठ। मौजूदा विधान परिषद शिक्षक और स्नातक चुनावों में नए-नए कीर्तिमान बन रहे हैं। मेरठ खंड शिक्षक सीट भाजपा ने 50 साल की ओमप्रकाश शर्मा की जीत का तिलिस्म तोड़ दिया, लेकिन ओमप्रकाश शर्मा चिरप्रतिद्वंदी शिक्षक नेता डाॅ. उमेश चंद त्यागी 24 साल से अपनी हार का तिलिस्म नहीं तोड़ पाए हैं। वह लगातार चार चुनावों में हारते चले आ रहे हैं।
मेरठ-सहारनपुर खंड शिक्षक एमएलसी सीट पर 1970 में माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष ओमप्रकाश शर्मा ने पहली जीत दर्ज की और इसके बाद लगातार आठ चुनावों से जीत हासिल कर रहे थे। इमरजेंसी के समय को मिलाकर उनका कार्यकाल 50 साल का हो गया। उन्हें चुनौती देने के लिए कई शिक्षक नेता मैदान में उतरें, लेकिन सभी धराशाही हो गए।
2002 से शुरू हुई चुनावी जंग
2002 के शिक्षक एमएलसी चुनावों में माध्यमिक शिक्षक संघ ठकुराई गुट के प्रांतीय उपाध्यक्ष डाॅ. उमेश चंद त्यागी ने ओमप्रकाश के साम्राज्य को चुनौती देने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। 2008 में एक बार फिर उमेश चंद त्यागी ने ओमप्रकाश शर्मा के खिलाफ चुनावी ताल ठोंकी और बहुत कम अंतर से चुनाव हार गए। उस समय ओमप्रकाश बमुश्किल चुनाव जीत पाए थे।
2008 में टूट सकता था तिलिस्म
ओमप्रकाश शर्मा का चुनावी तिलिस्म 2008 में ही टूट जाता। अगर उनके विरोधी शिक्षकों ने एकजुट होकर चुनाव लड़ा होता। एकबारगी उस समय शिक्षक नेता डाॅ. ओमपाल सिंह और उमेश चंद त्यागी के बीच मिलकर चुनाव लड़ने की बात चली। इसमें उमेश को शिक्षक सीट और ओमपाल को स्नातक सीट पर चुनाव लड़ाने की बात चली, लेकिन यह बात बनी रही। ओमपाल ने भी शिक्षक सीट पर चुनाव लड़ा और हार गए।
2014 के चुनावों में एक बार फिर उमेश त्यागी और ओमप्रकाश आमने-सामने आए। भाजपा ने भी अनिल अग्रवाल को चुनाव मैदान में उतारा। लेकिन ओमप्रकाश शर्मा का जादू बरकरार रहा और वह आठवीं बार चुनाव जीत गए। उमेश चंद को फिर हार झेलनी पड़ी। 2020 के चुनावों में हिम्मत ना हारते हुए उमेश चंद त्यागी ने फिर से चुनावी ताल ठोंक दी। इस बार भाजपा नेता श्रीचंद शर्मा ने ओमप्रकाश को करारी शिकस्त दी। उमेश चंद को तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा।
चार बार चुनाव हारने के बाद भी डाॅ. उमेश त्यागी हार मानने को तैयार नहीं है। वह इन चुनावों को सत्ता का चुनाव बताते हुए कहते हैं कि भाजपा ने सारा संगठन इन चुनावों में उतार दिया। वह अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे।