59 साल बाद ग्रहों का विचित्र महासंयोग ,भारत,चीन और पाकिस्तान पर होगा असर,घटेगी घटनाएं क्या

अहमदाबाद/ आगामी 10 फरवरी को अर्थात ठीक चार दिन बाद ब्रम्हांड मे 6 ग्रहो का 59 साल बाद महासंयोग बन रहा है और इससे नारद मुनि रचित ‘मयूर चित्रम’ नाम के ग्रंथ फल कथन के अनुसार इस विचित्र महासंयोग के कारण भारत में तेज हो सकता है ,किसान आंदोलन ,चीन पर आएगा कोई महासंकट ,उत्तर …

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February 6, 2021 4:08 pm

अहमदाबाद/ आगामी 10 फरवरी को अर्थात ठीक चार दिन बाद ब्रम्हांड मे 6 ग्रहो का 59 साल बाद महासंयोग बन रहा है और इससे नारद मुनि रचित ‘मयूर चित्रम’ नाम के ग्रंथ फल कथन के अनुसार इस विचित्र महासंयोग के कारण भारत में तेज हो सकता है ,किसान आंदोलन ,चीन पर आएगा कोई महासंकट ,उत्तर भारत में ओलावृष्टी ,देश-दुनिया में बड़े बदलावों का संकेत ,बड़े धार्मिक विवाद, मेडिकल के क्षेत्र में विवादस्पद घटनाक्रम ,चीन के बाजारों में गिरावट, शेयर बाजार में कुछ उथल-पुथल , असामान्य वर्षा , भूकंप से देश-दुनिया नुकसान , पाकिस्तान और उत्तर भारत में भूकंप के झटके आदि घटनाएं घटित होगी । यह भविष्यवाणी मुनी अजितचन्द्र विजय ने अपने गुरू की आज्ञा से की है ।

6 ग्रहों का विचित्र संयोग 

59 साल के बाद ग्रहों का विचित्र संयोग फरवरी के महीने में बनने जा रहा है। 10 फरवरी की रात जब चंद्रमा का प्रवेश मकर राशि में होगा तो एक ऐसा महासंयोग बनेगा जो दुर्लभ और अद्भुत है। इस महासंयोग पर दुनिया भर के ज्योतिषियों की नजर है, इसकी वजह यह है कि मकर राशि में 9 ग्रहों में से 6 ग्रह आकर मिलेंगे।

 

मेदिनी ज्योतिष में कहा गया है कि जब एक राशि में 5 या उससे अधिक ग्रह (राहु-केतु को छोड़कर) यदि आकर युति करें तब देश-दुनिया में बड़े भू-राजनीतिक बदलाव आते हैं। और इस बदलाव का असर कई दशकों तक रहता है। सूर्य, गुरु, शनि, मंगल, बुध तथा शुक्र आदि ग्रह जब एक राशि में आ जाएं तो युद्ध या बड़े जनांदोलन जैसी आपात स्थितियां पैदा होती हैं ऐसा नारद मुनि रचित ‘मयूर चित्रम’ नाम के ग्रंथ में सदियों पहले कहा गहा है।

 पहले कब बना था संयोग और क्या हुआ

इससे पहले फरवरी महीने में ही 1962 में मकर राशि में 7 ग्रहों का संयोग हुआ था। इस संयोग का परिणाम यह हुआ था कि दो महाशक्तियों अमेरिका और तत्कालीन सोवियत रूस ‘क्यूबा मिसाइल’ संकट में उलझ गए थे औऱ युद्ध के भय से विश्व राजनीति दो खेमों में बंट गई थी। इससे दशकों तक ‘शीत-युद्ध’ की स्थिति बनी रही। बाद में वर्ष 1979 के सितंबर महीने में सिंह राशि में 5 ग्रहों के योग ने ईरान में इस्लामिक क्रांति से मुस्लिम जगत में उथल-पुथल मचा दी, जिससे अफगानिस्तान, पाकिस्तान और भारत में इस्लामिक आतंकवाद का प्रसार हुआ और दशकों तक भारत सहित दुनिया के कई देशों में रक्तपात हुआ। अभी वर्ष 2019 में 26 दिसंबर को धनु राशि में सूर्य ग्रहण के समय 5 ग्रहों (राहु-केतु को छोड़कर) के योग ने कोरोना वायरस महामारी और आर्थिक मंदी से जो तबाही मचा दी है, उससे संपूर्ण विश्व बड़ी मानवीय त्रासदी से गुज़र रहा है। अब 10 तारीख की मध्य रात से 11 और 12 फरवरी को मकर राशि में बन रही 6 ग्रहों की युति एक बार फिर से देश-दुनिया में बड़े बदलावों का संकेत दे रही है।

भारत में तेज हो सकता है किसान आंदोलन 

12 फरवरी की अमावस्या की कुंडली का अध्यन करें तो तुला लग्न की कुंडली के चतुर्थ भाव में शनि, गुरु, शुक्र, बुध, चंद्रमा और सूर्य की युति से बन रहा षड्ग्रही योग किसान आंदोलन के जोर पकड़ने तथा कुछ उग्र होने का संकेत हैं। मेदिनी ज्योतोष में मकर राशि, शनि और चंद्रमा का कृषि उत्पादों और किसानों से विशेष संबंध है। मकर राशि में जुटने वाले 6 ग्रहों में से 4 ग्रह गुरु, शनि, बुध और शुक्र श्रवण नक्षत्र में युत होंगे। बृहत संहिता के अनुसार, श्रवण नक्षत्र को धर्म गुरुओं तथा वैद्यों (डाक्टरों) का कारक माना जाता है। इस योग के प्रभाव से बड़े धार्मिक विवाद तथा मेडिकल के क्षेत्र में कुछ विवादस्पद घटनाक्रम अगले दो महीनों में हो सकते हैं।

चीन पर आएगा कोई महासकंट

हमारे पडोसी देश चीन और पाकिस्तान को किसी बड़े संकट का सामना करना होगा, जिसकी ज्योतिषीय दृष्टिकोण से संभावना 6 ग्रहों के मकर राशि में युति से बन रही है। पाकिस्तान की चंद्र राशि मिथुन है, जिससे विनाश के अष्टम भाव में बन रही यह महायुति किसी बड़े भूकंप से देश को नुकसान पहुंचा सकती है। चीन की जन्म राशि मकर में शनि-गुरु सहित अन्य ग्रहों का गोचर वहां आर्थिक संकट से असंतोष पैदा करेगा। चीन के शेयर बाजारों में गिरावट दुनिया भर के धन कुबेरों को बड़ा झटका देगी। भारत में भी शेयर बाजार में कुछ उथल-पुथल मच सकती है।

 

मेदिनी ज्योतिष में मकर राशि को जल राशि तथा पृथ्वी तत्व से प्रभावित माना जाता है। मकर राशि में शनि-गुरु का युत होना तथा उससे केंद्र में मेष राशि में भूमि पुत्र मंगल की स्थिति भूकंपन का योग बनाता है। सूर्य और चंद्रमा 12 फरवरी की अमावस्या के दिन पृथ्वी तत्व की राशि और पृथ्वी तत्व के नवांश में होकर भूकंप का योग बना रहे हैं। इस योग के प्रभाव से 15 दिनों के भीतर पाकिस्तान और उत्तर भारत में भूकंप के झटके महसूस किए जा सकते हैं।

 

12 फरवरी की अमावस्या के बाद असामान्य वर्षा और ओलावृष्टि का योग भी बन रहा है। उत्तर भारत में ओलावृष्टि से कुछ स्थानों पर फसलों को नुकसान पहुंच सकता है तथा पहाड़ों पर बर्फ पड़ने से सर्दी का मौसम लंबा खींच सकता है।

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